मंगलवार, 23 जुलाई 2013

सच बोलना है पर घेरे के अन्दर

सच बोलना है पर घेरे के अन्दर 

जब एक बच्चे को अध्यापक बनाया तो बच्चा अध्यापक का स्वांग रच कर क्लास में
आया और बोला-अब मैं मास्टर बन चूका हूँ इसलिए मैं जो कहूँ उसे ध्यान से सुनो -
आज तक मेरे से पीछे वालों ने एक काम नहीं किया ,क्या आपको मालुम है ?

बच्चे बोले -नहीं मालुम।

मास्टर बोला-आज तक देश के सामने किसी ने सच नहीं बोला  ………………

बच्चों ने जम कर तालियाँ बजाई तो मास्टरजी बोले -..............लेकिन अब सच बोलना
है।

बच्चे मायूस हो गए। उनमे से एक बोला- सर ,किसी ने हेराफेरी पर बात की तो सही
नाम उगल दूँ ?

दूसरा बच्चा बोला-कोई पिछली चोरी पर बात करे तो क्या सही सही बयान कर दूँ ?

तीसरा बोला- कोई घोटाले की रकम किसके पास है पूछे तो बता दूँ ?

चौथा बोला- आज तक के फर्जीवाड़े का ढोल पीट दूँ ?

पाँचवा बोला - क्या रिश्ते नाते के झूठ भी उघाड़ कर रख दूँ ?

मास्टरजी बोले -……चुप ! सच बोलना है पर घेरे के अन्दर रहकर।

बच्चे बोले -मतलब ?

मास्टरजी ने समझाया - तुम्हारे से कोई अपराध हो गया तो घेरे में आकर सच
बता देना ताकि उसका तोड़ ढूंढ़ लिया जाए अगर घेरे में झूठ बोला तो झूठा
कहलाओगे। समझ गए

बच्चे बोले -हाँ जी।

मास्टर जी ने आज की क्लास शांतिपूर्वक खत्म कर दी।     
 

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