मंगलवार, 30 जुलाई 2013

मुहब्बत मिट नहीं सकती …………।

मुहब्बत मिट नहीं सकती …………। 

मुहब्बत अमर कहानी है, मुहब्बत मिट नहीं सकती।। 

मेरे दिल में - बसी हो तुम, तेरे दिल में - बसा हूँ मैं
तडफता मैं - अकेले में, तड़फती तुम - अकेले में 
ना मुझ को भूल पायी तू ,ना तुमको भूल पाया मैं  
जमाने के - हटकने से, मुहब्बत टल नही सकती ……

मेरा हर ख़्वाब तुम से है, तेरा हर ख़्वाब है मुझ से 
ना खुद को रोक पायी तुम, ना खुद को रोक पाया मैं  
तेरी हर साँस  मुझ से है: मेरी हर आस है तुम पर
जमाने के - बवन्डर से, मुहब्बत हिल नहीं सकती ……

मेरे रँग में - रँगी हो  तुम, तेरे रँग में - रँगा हूँ  मैं
मेरे बिन- तुम अधूरी हो, तेरे बिन- मैं अधुरा हूँ
मेरी तक़दीर तुम पर है, तेरी तजबीज है मुझ पर
ज़माने के बदलने से, मुहब्बत बदल नहीं सकती ……

सफर पर चल पड़ा था मैं, निभाया साथ तुमने भी  
कसम खायी थी  मेने भी, किया वादा है तुमने भी
मुझे विश्वास तुम पर है, तुझे विश्वास है मुझ पर
जमाने के- मिटाने से, मुहब्बत मिट नहीं सकती …… 

तुम्हारा साथ है पथ में, तो मंजिल दूर नहीं लगती
तुम्हारा प्यार है दिल में, तो साँसे थम नहीं सकती 
तेरी मंजिल - है  मुझ से, मेरा मुकाम-है  तुम पर
जमाने से - डर कर के, मुहब्बत रुक नहीं सकती …….


                                                                                           (इमेज गूगल से साभार )

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