रविवार, 7 जुलाई 2013

संवेदना

संवेदना 

सेठजी अपने आलिशान ऑफिस में बैठे अपने व्यवस्थापकों से राय मशवरा कर रहे थे।
चर्चा का विषय था कि उनकी प्रतिस्पर्धी कम्पनियों को किस तरह तहस नहस कर उनके
बाजार पर कब्जा जमाया जाये।सभी सलाहकार अपनी -अपनी योजनाये बता रहे थे।

आखिर में सर्वसम्मति से ये निर्णय लिया गया की सबसे पहले छोटी कम्पनियों को रास्ते
से हटाना है और जब तक वे तहस -नहस नहीं हो जाती तब तक माल की बिक्री लागत से
कम दाम पर करते जाना है और उनके हटने के बाद उनके व्यापार को हड़प कर लेना है।

सेठजी फुल प्रूफ योजना बना कर काफी संतुष्ट नजर आ रहे थे क्योंकि भविष्य में उनकी
कम्पनी छोटी कम्पनियों को रोंद कर आगे बढ़ने वाली है।

शाम को जब खुश मन से घर लौटे तो पत्नी को उदास पाया।उन्होंने पत्नी से तनाव का
कारण पूछा तो पत्नी ने बताया कि घर पर कपडे धोने वाली नौकरानी बीमार है और उसके
स्वस्थ होकर आने में काफी समय लगने वाला है।

सेठजी बोले -तो इसमें तनाव की क्या बात है,कपडे धोने का काम किसी और नई नौकरानी
को दे दो ,हमे तो पैसा देकर किसी से भी काम करवाना है।

सेठानी बोली -मेने भी यही सोचा था और दूसरी काम करने वाली नौकरानियों से बात भी
की थी मगर वो सब कहती है कि उसका काम हम कैसे ले ? वह विधवा है और उसके छोटे
बच्चे हैं अगर उसका काम हमने ले लिया तो वह अपना और बच्चों का पेट कैसे भरेगी?

सेठजी बोले -इन छोटे लोगों में बुद्धि कम होती है इसलिए ये गरीब ही रह जाते हैं तुम एक
दौ दिन में नयी कामवाली रख लो।उस दिन बात आई गयी हो गई और अगले दिन सेठजी
जब ऑफिस से शाम को घर लौटे तो पत्नी के चेहरे पर प्रसन्नता पायी।उसे प्रसन्न देख
कर उन्होंने पूछा -क्या नयी नौकरानी मिल गयी ?

उत्तर में सेठानी ने कहा -नयी तो नहीं मिली पर आस पास के घरों में काम करने वाली
नौकरानियों ने हल खोज लिया जिससे पुरानी नौकरानी का काम भी बना रहेगा और वह
नहीं आती है तब तक अपना काम भी हो जाएगा ?

सेठजी ने पूछा -वो कैसे होगा ?

सेठानी ने कहा -बाकी काम वालियों ने तय किया कि जब तक बीमार काम वाली स्वस्थ
होकर नहीं आ जाती तब तक उसका काम वे सब बारी बारी से करती रहेगी और उसके
काम की तनख्वाह भी उसे दे देगी ताकि उसके घर का चूल्हा जलता रहे।

सेठजी ये सुन कर भोंचक्के रह गए !                

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