मंगलवार, 24 सितंबर 2013

हम सुरती लाला

हम सुरती लाला 

सूरत के बासिन्दे अपनी जिन्दादिल्ली के लिए मशहूर हैं यहाँ के लोगों के लिए समस्या
या विपति  भी उत्सव से कम नहीं है . बाढ़ ,भूकंप ,महामारी कोई भी आपत्ति क्यों न हो ,
यहाँ के लोग समस्या से दो दो हाथ भी मुस्कराते हुए करते हैं ,आप जो तस्वीर देख रहे हैं
यह ताप्ति नदी के प्रचंड रोद्र रूप की है ,डेम से छोड़ा जा रहा अतिरिक्त जल से तापी रोद्र 
होकर बह रही है और इस कारण शहर के निचले हिस्सों में पानी आ गया है ,मगर 
सुरती बेफिक्र होकर इस समस्या को भी उत्सव की नजर से देखने उमड़ रहे हैं ,समस्या
को नजदीक से देखना उसे समझना उस पर विश्लेष्ण करना और फिर मिलझुल कर समस्या
से दो दो हाथ कर उसे पराजित कर देना यह सुरतीयो की खास विशेषता है  




यहाँ का बचपन निडर है ,ताप्ति रोद्र रूप में बह रही है
पर बच्चे इसे समझने की चेष्टा कर रहे हैं ,जिस धरती के बच्चे निडर हो
उस के बासिन्दे निश्चित ही कर्म शाली ही रहेंगे तभी तो व्यापार और उद्योग यहाँ फलते फूलते हैं


The southwest Monsoon has been vigorous over Gujarat state. (Photo courtesy: Hanif Malek)


इस पुल को ध्यान से देखिये यहाँ कारें चल नहीं रही है ,पार्किंग की है ताकि संभावित
बाढ़ से नुकसान ना हो ,यह विनोदप्रिय शेली यहाँ के लोगों को समस्या नहीं लगती है
एक को देख कर दूसरा भी अपनी कार को बाढ़ से बचाने पुल को पार्किंग करता जा रहा है
यहाँ के लोग मस्त रहते हैं ,हँसते खिलखिलाते हैं ,काम करते हैं परिश्रमी हैं ,जिन्ददिल्ली
के कारण ही इन्हें सुरती लाला कहा जाता है

यहाँ का यौवन सडको पर अटखेलियाँ करता है ,रोमांस करता है पर हमें परवाह नहीं हैं
क्योंकि सडक किनारे बैठ कर बतियाना  युवा दिलों को खूब भाता है .

हम बारिस देखने भी जाते हैं प्लेग से भी नहीं घबराते हैं कर्फ्यू को देखने का आनंद सडको
 पर जाकर ले आते हैं ,बाढ़ भूकंप या अन्य  आपदा सुरतियों के हौसले आज तक नहीं तोड़ पायी है


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