रविवार, 8 सितंबर 2013

हिंदु सन्त समाज को बदनाम करने में व्यस्त मिडिया

हिंदु सन्त समाज  को बदनाम करने में व्यस्त मिडिया 

टेलीविजन के समाचार चैनल वर्तमान में क्या दिखा रहे हैं ? जो अपने आप को
लोकतंत्र का एक स्तम्भ समझते हैं वे एक व्यक्ति के दुर्गुणों को चटखारे लेकर
प्रस्तुत कर रहे हैं। हिन्दुस्थान में लाखों हिन्दू संत और सन्यासी हैं जो पूज्य ,
दिव्य और विद्धवान हैं,मेने कभी टेली मिडिया को उनके सुविचारों और कार्य
कलापों का गुणगान करते हुए कभी नहीं देखा। मेने कभी टेली मिडिया पर उनके
द्वारा किये जा रहे लोक कल्याण कार्यों पर विभिन्न तथाकथित विद्धवानो को
उनके गुणगान करते नहीं देखा। इसके पीछे क्या कारण हैं  ……

      हम देख रहे हैं कि लाखों सन्त समाज में से एक संत के घिनोने काम को किस
तरह मिडिया दिन रात बता रहा है जैसे देश की सबसे बड़ी समस्या वो अकेला ही है।
इस देश के संसद के मन्दिर में हल्के दर्जे के कुछ सांसद बैठे हैं उनके आचरण को
लेकर यह मिडिया इतना क्यों नहीं चिल्लाता है क्या उनका देश लूटने का आचरण
किसी व्यभिचार से कमतर है ?मगर मिडिया का मकसद कुछ  …. ।

    अन्य धर्मो के कुकर्मो पर पर्दा डालने वाला मिडिया करोड़ो हिन्दुओं की भावनाओं
का अपमान क्यों कर रहा है ,जबकि वह जानता है कि अपराधी को दंडित करने के
लिए एक स्तम्भ अपना काम कर रहा है,क्या मिडिया खुद को न्याय का देवता
समझता है या फिर किसी की घिनोनी हरकत से खुद की कमाई  …। ।

      गँगा नदी को प्रदुषण मुक्त करने की मुहीम में प्राण गवाने वाले हिन्दू संत पर
ये मिडिया चुप क्यों था ,जिस तरह आशाराम के कुकर्म को और उसकी गिरफ्तारी
को भरपूर उत्साह के साथ बताया था मगर प्रदुषण मुक्त गँगा के लिए प्राण
 न्योछावर करने वाले संत से यह मिडिया दूर क्यों भाग रहा था ? क्यों  … ?

    ये कुत्सित मानसिकता वाले समाचार वाचक एक आशाराम के कारण समस्त
संत समाज को बदनाम करने पर क्यों तुले हैं ,शायद इसका एक उत्तर यह भी हो
सकता है कि हिन्दू संत क्षमा और करुणा को धारण किये रहते हैं और सद्भावना के
मूल सिद्धांत पर जीवन जीते हैं। क्या किसी कट्टरपंथी या ईसाई पादरियों के कुकर्मो
पर ये अपना मुँह खोलने का साहस भी करते हैं ? शायद नहीं ,क्योंकि वो उसका
अंजाम समझते हैं या फिर जानबूझ कर चुप्पी साध लेते हैं । 

   पाप का उदय कभी भी किसी में भी हो सकता है ,क्या मिडिया अपने को चरित्रवान
समझता है ?क्या मिडिया अपने कर्तव्य का निष्काम पालन करता है ? मिडिया में
ज्यातर महानुभाव अच्छे हैं मगर सब के सब तो अच्छे नहीं हैं ना। जब मिडिया में
अच्छे और कुत्सित दोनों प्रकार के लोग बैठे हैं तो विशाल हिन्दू संत समाज में
कुछेक पाखंडी भी बैठे होंगे इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है। कुछ गलत लोगों
के कारण पुरे संत समाज को विश्व फलक पर संदेह के घेरे में खड़ा करके यह ओछा
मिडिया क्या सिद्ध करना चाहता है ?

   यह देश तुलसी का है ,रहीम का है ,मीरां का है ,रसखान का है,कबीर का है,नानक का
है ,ख्वाजा का है ,विवेका नन्द का है। हमें अपने इन विद्धवान संतों पर गर्व है। मिडिया
अपने कर्तव्यों का ठीक निर्वाह करे ताकि जनता में उसकी विश्वसनीयता बनी रहे 

1 टिप्पणी:

Subodh Joshi ने कहा…

संत श्री आसारामजी बापू पर लगे आरोप के संदर्भ में क्या है सच्चाई ?
August 31, 2013

आज पुरे देश में हिंदूद्रोही मिडीया पूज्य आसारामजी बापू जैसे हिंदू संतोंपर घिनौने आरोप लगा रहा है । अभीतक बापूजी , पर किये गये आरोप सिद्ध भी नही हुए है, फिर भी मिडीया उन्हें लगातार ‘बलात्कारी’ कह रही है । परंतू यह मिडीया कल अगर बापूजी पर लगाए गए आरोप असत्य साबित होंगे, तो इस बारे में एक मिनीट की न्यूज भी नही दिखाएगी । हिंदूओ, जागे एवं इस मिडीया का पुरी तरह से बहिष्कार करे । - संपादक
हिंदुओ, प.पू. आसारामबापूकी अपकीर्तिके संदर्भमें यह जान लें !



लम्बे समय से संत श्री आसारामजी बापू व आश्रम को बदनाम करने के उद्देश्य से तरह-तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं, परंतु सभी आरोप झूठे और निराधार साबित हुए हैं । अब एक नयी सोची-समझी साजिश के तहत शाहजहाँपुर (उ.प्र.) की एक लड़की को मोहरा बनाया गया है ।

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