रविवार, 20 अक्तूबर 2013

चल सपना देख !!

चल सपना देख !!

सपना भी अजीब दुनियाँ रच देता है ,तरह-तरह के सपने ,सबके सपनों का रंग रूप भी
भिन्न -भिन्न। छोटे सरकार से बड़े सरकार सबको सपना देखना और दिखाना भाता है

   हमारे देश ने सालो पहले अपने प्रधानमंत्री की नजरों से एक सपना देखा -गरीबी
हटाओ। बड़ा रंगीन और मनभावन सपना था पुरे देशवासियों को भाया ,खेत ,ठाणी
गाँव ,क़स्बा ,शहर ,महानगर सब जगह हसीन सपने की चर्चा थी ,सबने सोचा -अब
बुरे दिन लद गए मगर हाय रे सपना ,ऐसा टुटा कि करोडो भारतीय टूट गये परन्तु
जिसने दिखाया उसका सिंहासन बना गया। ………।

 फिर आया शिक्षा का सपना ,सब पढने लगे ,रात और दिन ,बच्चे युवा और बूढ़े सब के
बस पढने लगे ,कोई नाम लिखना सीख गया ,कोई गिनती लिखना और कोई अक्षर
पढना सीख गया ,युवा और बच्चे किताबे गोकते गए ,कागज पर योग्यता कार्ड पाते
गये ,लेकिन हाय रे सपना , पढ़े लिखे निकम्मे और बेकार हो मख्खियाँ मारते रहे मगर
उनको सिंहासन मिलता रहा। …………

फिर आया भावनाओं का सपना  …. उनकी बदनसीब मौत एक जवान युवा सपने में
बदल गई। देश को लगा अब क्रांति की शरुआत होगी मगर हम देखंगे ,हम देख रहे हैं
हमे देखना है में सपना उलझ गया। ……………………।

फिर आया जातिवाद का सपना ,परमात्मा को घर देने का सपना। सबके सब लग पड़े
परमात्मा को घर देने के नाम पर।  दिखाया गया सपना चमत्कार से भरा था और
चमत्कार हुआ भी ,जिसको घर देने का वादा किया वह तो बेघर ही रह गया और घर
किसी और को मिल गया  ……। 

फिर आया आर्थिक उदारीकरण का सपना ,ले उधार ,ले उधार। बेच बाप दादा का माल
और पेल उदारीकरण। भाई ने कौडियाँ के दाम हीरे बेच दिए और जो दाम मिले उससे
जलसे करने लगे। देश डूब गया मगर उनका सपना तैर गया  …………

फिर लाये रोजगार गारन्टी का सपना ,खोद चोकड़ी और ले जा रोकड़ ,लिखा दे फर्जी
नाम और करले रोकड़ी ,गाँव के गाँव लग गए खोदने और रोकड़ पाने के चक्कर में
सपना फिस्स हो गया ,खुद के हाथ लुल्ले हो गए ,दूसरो की पीठ पर चढ़कर फिर आ
गए नया सपना लेकर   ……।

 चालू गाडी में सपना आया -लूट ले और झोली भर ले। जिसको जहाँ जो हाथ लगा
अपने खिस्से के हवाले किया ,अरबों लोगों के सपने टूट गए तो हजारों ने  सच भी
करा लिए गए

अब फिर सपना दिखाना था सो ले आये -खा खा कर तोंद भरने का सपना ,सबके
पेट भरेंगे ,सबकी तोंद निकल आयेगी ,बस इस बार कृपा कर दो नाथ  …. अगर
नाथ ने कृपा कर दी तो फिर राजा का सोना  …. कसम से पीगल कर फिर हजारो
हाथों में चला जाएगा और अरबों लोग कंगले हो जायेंगे और अमीरी के सपने देख
खुश होते रहेंगे  ……………    
   

कोई टिप्पणी नहीं: