गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

हम …………

हम  …………

1. पाप करने का मौका मिल जाए तो छोड़ते नहीं और मौका नहीं मिला तो ताक
में बैठे रहते हैं और मौका मिलते ही पाप कर बैठते हैं बदकिस्मती से पाप करने
का मौका नहीं बना पाये तो सज्जन का तुकमा अपने पर फिट कर लेते हैं

2. स्वच्छता और सफाई को पसंद करते हैं मगर अपने घर तक ,अपने घर का
कचरा बड़े मजे से सोसायटी या सड़क पर उछाल देते हैं और सारा दोष नगर
पालिका पर डाल देते हैं कि कर्मचारी पगार लेते हैं पर काम नहीं करते हैं

3 . मानते हैं की रिश्वत तब बुरी है जब दूसरा लेता और देता है मगर देने और
लेने वाले में एक जगह हम खुद होते हैं तो वह व्यवहार की परिभाषा में ही आता
है
4 . जन सेवक तब ही बुरा होता है जब वह सत्य पर अड़ जाता है और बुरी चीज
एक जगह ज्यादा समय तक नहीं टिक पाए इसलिए हम तबादला शस्त्र का
उपयोग करवाते हैं

5 . पराई वस्तु को महान समझते हैं चाहे वह पहनावा हो,भाषा हो,या स्त्री
अपना पहनावा जाहिल लगता है ,अपनी भाषा अशिष्ट और स्त्री गँवार जो
इनसे हट कर खुद को देखता है वह या तो मंदबुद्धि है या फिर ढोंगी या कोई
काल विशेष का जीव
6 . फटे में टांग अडाने वाला सफल राजनीतिज्ञ बनता है और नए वस्त्र की
सिलाई कहाँ से उधेडी जा सकती है और उसमे किस तरह से टांग अड़ाई जायेगी
पर माथा लडाने वाला महान रणनीतिकार बनता है
7 एक निर्धन जब भीख मांगता है तो उसे भिखारी कह दुत्कारते हैं लेकिन
सरकार जब सब्सिडी बाँटती है तब हम वारिस बन जाते हैं और हक़ से मांगते हैं  

कोई टिप्पणी नहीं: