सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

पुराने कपड़े और संतुष्टी

पुराने कपड़े और संतुष्टी 

कुछ साल पहले का वाकया है और हर कस्बे ,शहर और महानगर में घटित होता
रहता है। वाकया यह था कि सडक के किनारे स्टील और प्लास्टिक के बर्तन लिए
दो -तीन औरते बैठी थी और कभी कभी आवाज भी लगा देती थी -पुराने कपड़े दे
दो ,बर्तन ले लो।

  गली की कुछ औरते पुराने कपडे लेकर गयी और मोल भाव करके पुराने कपड़े
देकर बर्तन ले आयी ,नए बर्तन लाने वाली औरतों में मेरी पत्नी भी शामिल थी
जब रात को मैं दुकान से लौट कर घर आया तो उन्होंने वे बर्तन मुझे दिखाए जो
पुराने कपड़ों के बदले लिए थे और बर्तनों को चाव से देख भी रही थी और सामने
वाले भाभी की प्रशंसा भी कर रही थी जो भाव ताव करके कम कपड़ो में ज्यादा
बर्तन दिलवा दी थी।

मेने पत्नी से पूछा -ये बर्तन कितने कपडे देकर लिए हैं और बाजार से खरीदती
तो कितने में आ जाते ?

उन्होंने बताया -मेरी पुरानी सात साड़ियाँ और आपके और बच्चो के मिलाकर
दस जोड़ी कपडे थे और बाजार से खरीदने पर चार सौ रूपये तो लग ही जाते।

मेने उनको समझाते हुए कहा -वैसे आपने जो किया वह अनुचित नहीं है लेकिन
क्या कपड़ों के बदले सामान लेने से आपको संतुष्टि मिली ?

वो बोली - ना ,मगर पुराने कपड़ो में जो मिला वह ठीक ही है।

मेने कहा -आप इससे ज्यादा पा सकती हैं और मन में संतुष्टि भी मिल जायेगी।

वो बोली -कैसे ?

मेने कहा -आज से निश्चय करलो कि आप कोई भी पुराना कपडा देकर सामान
नहीं खरीदेंगी और जो कपडे अच्छे हालत में हैं उन्हें आप गरीबों में वितरित कर
दोगी। आपकी पहनी हुई साडी से किसी गरीब की लाज ढकी जा सके ,आपके
बच्चों के कपडे किसी गरीब बच्चे का तन ढक सके यह काम संतुष्टि देगा।

उसके बाद उन्होंने अपनी साड़ियाँ जो पुरानी हो जाती है उन्हें समय से कुछ पहले
उपयोग में लाना बंद कर देती है और अपने ही घर में काम करने वाली कामवाली
बाइयों को पहनने के लिए दे देती है।

हममे से बहुत से ऐसे भारतीय हैं जो नये वस्त्रों का दान करने की सामर्थ्य नहीं
रखते हैं मगर पुराने कपड़ो को बेच कर उसके बदले में वस्तु लेने के लालच से
बच सकते हैं, हम गरीब देश के वाशिंदे हैं और आज भी हर राज्य के पिछड़े और
वनवासी इलाको में वस्तुओ का घोर अभाव है ,हम सामर्थ्य के अंदर कुछ अच्छा
कर सकते हैं जिसे पाकर किसी अभावग्रस्त के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है।

कृपया पुराने कपड़े जो पहनने योग्य हो तो उन्हें किसी अभावग्रस्त जरूरतमंद को 
दे दे ,आपका यह काम निश्चित रूप से आपको मानसिक संतुष्टि देगा।    

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