गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

मोदी से भय क्यों है अन्य दलों को ?

मोदी से भय क्यों है अन्य दलों को ?

राष्ट्रिय राजनीति में नरेन्द्र मोदी जैसे ही आये बूढ़े और नये सभी राजनैतिक पार्टियों 
में सुनापन आ गया ,कुछ हक्के बक्के हैं तो कुछ बेहोश ,चारों तरफ सभी दलों में 
हाहाकार मचा है -रोको ,रोको  … मगर सबके उपाय अभी तक निरर्थक साबित हो 
रहे हैं ,क्या कारण है मोदी से भय खाने का --
1 .छद्म धर्म निरपेक्षता के खोल के लितरे हो जाना -ज्यादातर पार्टियाँ खुद को छद्म 
धर्मनिरपेक्षता की केंचुली में छुपाये रखना पसंद करती है जबकि यथार्थ के धरातल 
पर उन्होंने उनको अभी तक मुख्य प्रवाह से जोड़ा तक नहीं है। 66 वर्ष से तथाकथित 
धर्म निरपेक्ष सरकारे राज करती रही है मगर उनको साथ नहीं सिर्फ अँगूठा दिखाया 
है और मोदी इसी तथ्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि वो शठ को शठ और सज्ज्न 
को सज्ज्न कह देते हैं 
2. उदारीकरण का असफल हो जाना -देश को जबसे उदारीकरण के दौर में लाया गया 
तब से देश पिछड़ रहा है ,वर्तमान भी भूतकाल से कुछ सीख नहीं पा रहा है जिसका 
कुफल यह हुआ कि आम आदमी कि रीढ़ ही टूट गयी है और हम 26/-कमाने वाले को 
अमीर की श्रेणी में रख विश्व को और खुद को गुमराह कर रहे हैं। आज हम स्वदेशी का 
जनाजा निकाल कर FDI को प्रोत्साहन दे रहे हैं ,हमारा आलू हमसे १०/- में खरीद कर 
४००/-में चिप्स हमे ही खिला रहा है। हमारे ही पानी का दुरूपयोग कर हमे ही १५/- की 
पेप्सी कोक पिला रहा है  और मोदी गुजरात में देश के उद्योगपतियों कि पीठ थप थपा 
रहा है 
3. महँगाई कि सुनामी - इस उदारीकरण के कुचक्र से महँगाई कि देश में सुनामी आ गई 
है ,२६/-वाला अमीर भूख से बिलबिला रहा है ,मध्यम वर्ग के आँसू यह सरकार पोँछ 
नहीं पायी है ,आये दिन वादे और आश्वासन। … मोदी २६/- वाली अमीरी को बचपन में 
भोग चुके हैं और इसीलिए वो नागरिकों से सवाल करते हैं कि क्या क्या मिलता है २६/-में 
और जनता इनको आजमाने कि कोशिश में लगी है 
4. भ्रष्टाचार - विदेशों में भारतीय प्रधानमंत्री को इसलिए भी जाना जाता है कि वे अच्छे 
अर्थशास्त्री हैं मगर भ्रष्ट टोले के मुखिया है। इस सरकार के काल में बहुत ही कलंकित 
भ्रष्टाचार के कारनामे हुये हैं मगर किसी से आज तक देश का लूटा हुआ धन वापिस 
नहीं ले पाये और मोदी खुद बेदाग़ शासन दे रहे हैं और पुरे देश को देने का वादा भी कर 
रहे हैं 
5. रोजगार के अवसरों का अभाव -देश का युवा पढ़ने के बाद भी रोजगार का रास्ता 
नहीं ढूंढ पा रहा है ,बेरोजगार डिग्रीधारी हताश और निराश है ,उसके दोनों हाथ काम 
चाहते हैं मगर काम नहीं है और मोदी के शासन में बेरोजगार अन्य प्रदेशो की तुलना 
में बहुत कम है और मोदी जब युवाओ से भारत के भविष्य को जोड़ते हैं तो युवा 
खिल उठता है 
6. गिरती विकास दर - अर्थव्यवस्था का पहिया चरमरा रहा है ,सरकार अपना दामन 
साफ बताने के लिए पुरे विश्व को दोषी ठहरा देती है ,सबका बुरा हाल है तो हमारा तो 
होना ही है ,गाँव के सब बच्चे फेल हो गए तो मास्टरजी का बच्चा कैसे पास होगा ?
मोदी अपने राज्य को पुरे विश्व के गिरने पर भी सम्भाले हुए दौड़ रहे हैं। समूचा विश्व 
उन्हें देख रहा है और वो करिश्मा दिखा भी रहे हैं 
7. नए सूत्र नए सपने -सरकार एक तरफ कहती है कि गरीब जनता को दी जा रही 
सब्सिडी हटानी पड़ेगी और दूसरी ओर २/- किलो अनाज देने कि बात करती है। अजीब 
विरोधाभास   … चुनाव के साल में रेवड़ियाँ बाँटने का समय बीत गया है। देश आगे 
बढ़ने कि बात सुनना चाहता है और ये वही घिसे पिटे सूत्र आजमा रहे हैं और मोदी 
कहते हैं -नेशन पहले ,सबका साथ -सबका विकास   

ये कुछ मुख्य कारण हैं जिनके कारण पुराने और नए दल बोखला गए हैं और मोदी 
के भय से बीमार हैं   

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