शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

धार्मिक चित्र और चिन्ह का ना हो अपमान

धार्मिक चित्र और चिन्ह का ना हो अपमान 

कुछ दिन पहले मैं बाजार में कुछ खरीदी के लिए गया था। दुकानदार अच्छी ग्राहकी के
कारण व्यस्त था। मेरे आगे जो ग्राहक खड़ा था उसका बिल दुकानदार बना रहा था।

ग्राहक ने दुकानदार से कहा -भैया ,मेरे दोनों बिल एक साथ पिन कर देना। दुकानदार
ने स्टेप्लर पिन लगा दी और फिर तसल्ली से भुगतान के पैसे गिनने लगा। मेने
देखा कि जिन दोनों बिलों को स्टेप्लर किया था उसी जगह श्री गणेश का फ़ोटो छपा था
और वह स्टेप्लर उन दोनों बिलों पर छपी फोटुओं पर लगी थी। इस बात का भान ना
तो दुकानदार को था और ना ही उस ग्राहक को।

मेने उस दुकानदार से पूछा -भैया ,आप भगवान् गणेश और लक्ष्मी में श्रद्धा रखते हैं ?

दुकानदार बोला -श्रीमान ,यह भी भला पूछने की बात है ,गणेश और लक्ष्मी कि अर्चना
पूजा तो हर दिन करते हैं ,देखो दुकान में पूजा स्थल भी है।

मेने पूछा -क्या आप पूजा करके फिर भगवान को सुई भी चुभोते हैं ?

दुकानदार को गुस्सा आ गया और गुस्से से बोला -आप कैसे व्यक्ति हैं जो बेहूदा प्रश्न
कर रहे हैं ,मुझे भगवान् में श्रद्धा है मैं उनका अपमान इन हाथो से करने कि सोच भी
नहीं सकता।

मेने कहा -भैया ,आपने अभी जो बिल स्टेप्लर किये हैं उनको देखिये ,आपने गणेश के
फ़ोटो पर पिन चुभो दी है।

दुकानदार ने स्टेप्लर किये बिल को देखा और बोला -सॉरी ,मगर यह अनजाने में हुयी
भूल है  …।

मेने कहा -यह मैं भी जानता हूँ। क्या आपका बिल इस धार्मिक फ़ोटो या चिन्ह का
उपयोग किये बिना भी छप सकता है ?

दुकानदार ने कहा -हाँ ,और आगे से मैं कभी इस तरह के धार्मिक फ़ोटो और चिन्ह का
उपयोग व्यावसायिक किताबों पर नहीं करूंगा।

मेने दुकानदार से कहा -भैया ,हम लोग श्रद्धा से व्यावसायिक बुक पर ये सब छपवाते हैं
परन्तु फिर इन पवित्र चिन्ह और फ़ोटो का अनजाने में अपमान करते रहते हैं। जिस
तरह से आपने भविष्य में धार्मिक फ़ोटो और चिन्ह का उपयोग बिल पर नहीं करने का
संकल्प लिया है वैसे ही सब जागरूक होकर इस छोटी बात पर ध्यान दे।

अपने व्यावसायिक लाभ के लिए जिन धार्मिक चिन्हो और फ़ोटो का उपयोग हम करते हैं 
उन पवित्र प्रतीकों कि पवित्रता कि रक्षा करना भी हमारा ही कर्तव्य है   

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