गुरुवार, 7 नवंबर 2013

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण, परिवर्तन का शंखनाद ?

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण, परिवर्तन का शंखनाद ?

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में चार बड़े राज्यों में काँग्रेस लड़खड़ा रही है ऐसा समाचारों में
दिखाया गया है। कांग्रेस की लड़खड़ाहट के संभावित कारण !!
1. अहँकारी नेता
2. तथ्यों से परे सपनों में जीना
3. जन लोकप्रिय नेताओं का टोटा
4. भ्रष्टाचार को रोक पाने में असफलता
5. असफल विदेश नीति
6. मूल्य खोता रुपया
7. कागज पर सफल योजनाये ,धरातल पर असफल
8. नकारात्मक चुनावी प्रचार
9. आक्रमण की जगह बचाव की नीति
10. युवा शक्ति का मोह भंग होना
11. छद्म धर्मनिरपेक्षता का सहारा
12. जनता में भरोसा जमाने में नाकामयाब आभामंडल
13. लोकलुभावन योजनाओं की पुरानी थ्योरी
14. साथी दलों का हावी रहना
15. घोषित कामो का न हो पाना
16. निष्प्रभावी आर्थिक नीति
17. बिना सेनापति के चुनावी रण
18. जनता की अभिव्यक्ति को समझने में असफल
19. परिवार वाद का आरोप
20. घटता रोजगार    

सत्ताधारी दल चुनाव तक अपने को कैसे संभालता है यह आने वाला समय तय
करेगा। क्या चुनाव पूर्व सर्वेक्षण सही होंगे ? क्या देश कि जनता निर्णायक बदलाव
लाएगी या तिराहे पर देश को खड़ा कर देगी।

कौनसा दल सरकार बनायेगा यह मुख्य नहीं है ,सुदृढ़ लोकतंत्र के लिए जरुरी यह 
है की कितने प्रतिशत लोगों ने अपने वोट के अधिकार का उपयोग किया।  

कोई टिप्पणी नहीं: