शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

नयी परिभाषा

नयी परिभाषा 

इस देश के नेता कब क्या कह जाते हैं यह सोच कर की जनता याद नहीं रखती। आये दिन
नयी परिभाषाएँ बनाने की जुगत में हर कोई लगा है चाहे वह अपनी सोसायटी के किसी
पद पर है या फिर समाज,गाँव ,शहर राज्य या देश के किसी नेता पद पर।
कुछ शब्दों कि नयी सीमा रेखाएँ -

सच :- मैं जो कहूँ और जिसे मानू  वही सत्य 

सरलता :- जो व्यक्ति मेरे  गलत इशारे पर भी नाचे वह सरल 

नैतिक :- जो मुझे रूचिकर लगे और लोग उस पर अँगुली ना उठाये 

वादा :- वो शब्द जिसे मेरी मर्जी से तोडा या टुकड़े टुकड़े कर जोड़ा जा सके  

कसम :- लोग तब भी विश्वास करे जब मैं इसे तोड़ मरोड़ दूँ 

वफादार :- जो मेरे काले कारनामों को दबा दे ,मिटा दे 

ईमानदार :- जो व्यक्ति मेरे पक्ष में खड़ा हो सके 

भ्रष्ट :-मेरा विरोधी तथा मेरे पक्ष में रहकर आँखे और कान खुले रखता हो 

व्यवहार :- उचित काम करने पर दी जाने वाली अनुचित राशी 

होशियारी :- मैं कसम तोड़ता जाऊँ और जनता समर्थन देती रहे 

समझदार :-नाव डूबती देख विरोधी का पल्ला थाम ले 

सेवा :- जिस काम को खूब प्रचारित जा किया जाये और आडम्बर भी फैले 

त्याग :- अपराध सिद्ध हो जाने पर पद से लिया गया इस्तीफा 

अहँकार :- विरोधी द्वारा कहा जा रहा कड़वा सच 





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