गुरुवार, 16 जनवरी 2014

गणतंत्र ने क्या दिया ?

गणतंत्र ने क्या दिया ?

    गणतंत्र के भी साइड इफेक्ट हैं ,यह कोई निर्दोष जीवन प्रणाली नहीं है लेकिन  परहेज
का पालन करते हुये उपयोग में लायी जाने पर सुखद परिणाम देने वाली पद्धति जरुर है।

    गणतंत्र का एक बड़ा दोष यह है कि यह तंत्र बुद्धिबल से नहीं संख्या बल से चलता है।
इसमें हक़ मत देने के अधिकार का उपयोग करने करने पर मिलता है केवल सुन्दर,
शाब्दिक बहस भर से नहीं। लोकतंत्र में यदि संख्या बल नहीं होता है तो सेवाभावी व्यक्ति
कुछ नही कर पाते जो व्यक्ति या समुह येन केन प्रकारेण संख्या बल जुटा लेता है उसके
खोटे और तुष्टिकरण के विचार भी मान्य सिद्धांत बन जाते हैं ,कानून बन जाते हैं जिसका
49 लोगों को निर्वहन करना पड़ता है जो उससे भिन्न मत रखते हैं।

    गणतंत्र समता के सिद्धांत पर चलता है ,गणतंत्र समान न्याय व्यवस्था के सिद्धांत पर
चलता है ,गणतंत्र सर्व धर्म समभाव के आधार पर चलता है ,गणतंत्र सम्यक दृष्टि से
चलता है ,क्या हमने ऐसा कभी महसूस किया है ?

   हमने गणतंत्र को धर्म विभेद के साये में पलते देखा है,हमने गणतंत्र को जाति गत गणना
के आधार खिसकते देखा है,हमने गणतंत्र को स्वार्थ सिद्ध करने की पगडण्डी के रूप में देखा
है ,हमने गणतंत्र में निर्बल को अधिकार विहीन बेसाखी पर झूलता पाया है,हमने गणतंत्र में
राज कोष के धन का खुल्ला दुरूपयोग देखा है,हमने गणतन्त्र के नाम पर झूठी कसमें खाते
जनसेवकों को देखा है ,हमने गणतंत्र में ध्रुव विरोधी दलों को हाथ मिलाते और गले मिलते
देखा है ,हमने गणतंत्र में अवाम को पग पग पर ठगा हुआ पाया है।

           आज बहुसंख्यक समाज खुद को निरीह अवस्था में पाता है तो अल्प संख्यक समाज
खुद को ठगा हुआ पाता है। यही सच है  ................... इस परिस्थिति का जबाबदार कौन ?
निसन्देह ,जिसने भी शासन किया वो लोग।        

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