गुरुवार, 23 जनवरी 2014

सर्व धर्म सद्भाव चाहिये या तथाकथित धर्म निरपेक्षता

 सर्व धर्म सद्भाव चाहिये या तथाकथित धर्मनिरपेक्षता 

"मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना" यह बात यदि सही है तो फिर धर्म में 
विश्वास नहीं रखने वाली सोच की देश को जरुरत क्यों है ?
मजहब कोई सा भी हो ,प्रेम की भाषा रखता है अगर यह बात सही है तो साम्प्रदायिकता 
कौन सीखा रहा है ?
धर्म सदाचार सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता   .... 
धर्म परोपकार सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता   .... 
धर्म नीति सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता    …
धर्म शुचिता सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता   … 
धर्म दया ,करुणा और मैत्री सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता  .... 
धर्म सत्य सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता   … 
धर्म समदृष्टि देता है और धर्मनिरपेक्षता   … 
धर्म न्याय सिखाता है और धर्मनिरपेक्षता   … 
धर्म सबके मंगल का भाव भरता है और धर्मनिरपेक्षता  … 
धर्म कल्याण का दीप जलाता है और धर्मनिरपेक्षता   … 
धर्म विकास का पथ है और धर्मनिरपेक्षता  … 
धर्म जो भी हो ,उसके सत्य स्वरुप की जय हो ,जय हो 
   

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