शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

उल्लू और चमगादड़ का शास्त्र

उल्लू और चमगादड़ का शास्त्र

क्या पता था उल्लू महाशय को कि एक समय ऐसा भी आयेगा जब लोकतंत्र में उसकी
विचारधारा पर भी चिंतन ,मनन ,शास्त्रार्थ और अनुकरण होगा। ज्ञानी और विद्धवान
उसकी जय जयकार करेंगे और आम जनता उसे प्रमुख योग्य प्रशासक के रूप में
विराजमान कर देगी।

 उल्लू जाति की खास विशेषता है कि वो अपने अनुभवों को ही सही ठहराते हैं और
उस पर डटे रहते हैं। जिस दिन से उल्लुओं के मुखिया ने अपनी बिरादरी को कहा कि
सूरज रात में उगता है ,दिन में नहीं उगता है इसलिए हमें सबके आदर्शो को छोड़
सनातन सत्य को छोड़ इसी बात पर डटे रहना है और अपनी दिनचर्या रात से ही शुरू
करनी है तब से आज तक उल्लू बिरादरी इसी सत्य पर डटी है।

हमने जब एक उल्लू से पूछा की आप इस ग्लोबल युग में इस परिपाटी को क्यों
पकडे हैं तो उसने बताया -यह विशेषता हमें सबसे अलग चितरती है क्योंकि हम
कोई टोपी,झण्डा या बैनर लेकर प्रचार नहीं कर सकते इसलिए इसी परिपाटी को
चलन में रखे हुए हैं ?

मेने उल्लू से फिर सवाल किया -क्या आपकी इस अनूठी विचारधारा का किसी ने
अनुकरण भी किया है ?

उल्लू बोला -हाँ ,हमारी सोच सबसे अनूठी थी हँस और बाकी पक्षियों ने भले ही उसे
अव्यवहारिक कदम ठहराया हो अगर हमारे प्रिय चमगादड़ समुदाय ने इस सत्य को
पहचाना और हमारा पूर्ण सहयोग किया ,वे भी अब रात्रिकाल को ही दिन मान कर
विचरते हैं।

मेने फिर उल्लू से पूछा - आपके शास्त्र में और भी कोई खास बात लिखी है ?

उल्लू बोला -जिसने भी हमारे शास्त्र का अध्ययन किया है वह बड़ा नेता या राजा ही
बना है,चाहे वह पशु हो या मनुष्य। हमारी बिरादरी की सँख्या हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही
है,नेता लोग अपनी जनता को बड़ी खूबी से हमारे शास्त्र की घुटी पिलाते रहे हैं और
अपना-अपना व्यवसाय चलाते रहे हैं।

मेने पूछा - आप अपने प्रिय चमगादड़ शास्त्र पर भी कुछ प्रकाश डालेंगे ?

उल्लू बोला -वैसे तो वे हर बात पर हमारा अनुसरण करते हैं मगर उनकी खास बात ये
है कि वे हम जब बोलते हैं तब अपनी बुद्धि का उपयोग और इस्तेमाल बंद कर देते हैं।

मेने पूछा -उल्लू महाशय,क्या आपने चमगादड़ साथियों से भी कुछ सिखा है ?

उल्लू बोला -हमे चमगादड़ समुदाय का विचार बहुत प्रिय लगता है जिसे हम पुरे
होशो हवास से समर्थन देते हैं   …

मेने पूछा -वो कौनसा विचार है ?

उल्लू बोला -चमगादड़ समुदाय का मानना है की यह आकाश उनकी बदोलत ही पृथ्वी
पर गिरता नहीं है इसलिए वे जब नींद भी लेते हैं तो आकाश को अपने पंजो पर थामे
रहने का काम करते हुए लेते हैं ,बड़े भक्त लोग हैं ये ,हमें भी यही लगता है कि यह
आकाश चमगादड़ की वजह से गिर नहीं रहा है और हम भी एक बैठक बुला कर उल्लू
समाज को पंजों को ऊपर रख सोने का प्रस्ताव पास करवाएंगे।

उल्लू का उत्तर सुन मैं विचारों में खो गया मेरे ख्यालों में मेरा लोकतंत्र था।         

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