सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

लोकतंत्र में यह भी चलता है …………

 लोकतंत्र में यह भी चलता है  ………… 

जब -जब चुनाव का बिगुल बजता है तब लोकतंत्र में यह सब भी चलता है,
बिना काम किये कुछ अन्धे नेता सत्ता इन तरीकों को आजमा कर पाना 
चाहते हैं। जैसे - 

गँवार 
लोकतंत्र चुनाव के उत्सव से मजबूत होता है और उसकी तैयारी में टुच्चे नेता 
सुनसान जगह पर जा कर अपने भाषण की तैयारी में लगे हैं। अपनी प्रतिध्वनि 
की परवाह किये बिना नेता जोर से एक बार चीखता है और प्रतिध्वनि अधिक 
बार उसके कानो में गूंजती है -
1. उल्लू ,उल्लू,उल्लू 
2. जहर ,जहर, जहर 
3. कुत्ता ,कुत्ता ,कुत्ता 
4.खुनी,खुनी,खुनी 
5. साँप ,साँप ,साँप 
6. चोर ,चोर चोर 
7. हिटलर ,हिटलर ,हिटलर 
8. मौत का सौदागर,मौत का सौदागर ,मौत का सौदागर 
9. सांप्रदायिक,सांप्रदायिक ,सांप्रदायिक 
10. झूठा ,झूठा,झूठा 
11. बच्चे की कसम,  बच्चे की कसम ,बच्चे की कसम 
12. लुटेरे ,लुटेरे लुटेरे 

बेहरूपिया -
कुछ बगुले नेता ,कुछ आडंबरी नेता ,कुछ स्वार्थी नेता बेहरूपिया बन लोकतंत्र 
को मजबूत करने की फिराक में हैं उनके झोले में पगड़ी है,टोपी है ,माला है ,
रामनामी दुपट्टा है,बाईबिल है ,रामायण है ,कुरान है,ग्रंथ साहिब है ,कभी 
श्लोक पढ़ते हैं ,कभी आयत बुदबुदाते हैं ,कभी यीशुवाणी गाते हैं … ये सब देख 
बेहरूपिये अपना धंधा छोड़ पुरुषार्थ का काम करने लग गए ,मेहनती बन गए हैं  

भांड -
 चाटुकारिता कभी भांड जाति की बपौती थी ,दादा -परदादा के जमाने से 
बेचारे चाटुकार बन पेट पालते थे ,जब से लोकतंत्र आया है तब से इनका धंधा 
निकम्मे नेताओं ने अपना लिया है अब एक मौहल्ले में नेता हिन्दू के पैर पड़ता 
है ,दूसरे मौहल्ले में मुस्लिम के सिजदा करता है ,तीसरे मौहल्ले में सिक्ख की 
चरण रज माथे पर लगाता है चौथे मौहल्ले में क्रॉस को गले में लटकाता है और 
अलग -अलग गीत गाता है।      

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