रविवार, 23 फ़रवरी 2014

वक्त का तकाजा है, जाग जाओ।

वक्त का तकाजा है, जाग जाओ।

आज हर ओर देश में राजनैतिक दल हिन्दु समाज को तोड़कर और अल्पसंख्यक को
मुख्य धारा से दूर रखकर सियासत कर रही है इस कुटनीति का परिणाम देश के लिए
घातक सिद्ध हुआ है और होता जा रहा है।

        आज झूठी निरपेक्षता के ठेकेदार दल दो कौमों के बीच झूठे द्वेष के बीज रोपकर
काल्पनिक भय का निर्माण कर रहे हैं ,क्यों? सत्ता भोगने के लिए ही  ना ! तुष्टीकरण
का विनाशक बीज राष्ट्रवाद को निगल रहा है ,यह सब जानते समझते हुए भी शातिर
लोग तुच्छ स्वार्थों को पूरा करने के लिए सूखे चारे में चिंगारी डाल रहे हैं ,क्यों ?ताकि
अवाम उलझा और बँटा रहे और कलंकित झूठी निरपेक्षता सत्ता भोगती रहे।

      हिन्दू समाज को छुआछूत के नाम पर तोड़ने का पाप करने वाले लोग आज
खुद को धर्म निरपेक्ष बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे,हिन्दू समाज में छुआछूत
की बीमारी पहले नहीं थी। रामायण के साक्ष्य हिंदुत्व का चित्र विश्व के सामने रख
चुके हैं।  निषाद, भील, सबरी, जटायु,वानर,काक भुसुंडी आदि से श्री राम के आत्मिक
स्नेहिल सम्बन्ध थे। शुद्र को जाति से जोड़ने का काम इस देश के नेताओं ने किया।
मानव से मानव को लड़ाने का काम करने वाले नेताओं की जमात हिन्दू धर्म के
सिद्धान्तों से शुद्र है।

     हिंदुओं को सांप्रदायिक ठहराने वाले नेताओं को,तुष्टिकरण से अधिकारों का अवैध
हस्तांतरण अन्य लोगों को करने वाले नेताओं को लोकतान्त्रिक तरीके से परास्त
करने का समय आ गया है,इनका बहिष्कार करने का मौका अब हाथ में है।

     इस देश के 70 %से ज्यादा लोग यदि साम्प्रदायिक कहे जायेंगे तो वक्त की माँग
है कि उन अधम नेताओ को चुन -चुन कर चुनाव में परास्त करो ताकि उनके पैर
जमीन पर टिक जाएँ और आगे से कोई भी नाग तुष्टिकरण का जहर उगलने का
दुःसाहस ना करे।

  हिन्दुस्थान में पोषित हो रही विविधता का सरंक्षण ऐरे गैरे नत्थू खैरे नेताओं के
कारण नहीं हुआ है इस विविधता को सींचने का काम हिंदुत्व के विशाल ह्रदय घट
से बहने वाली "जीओ और जीने दो" की पवित्र धारा से, हर प्राणी में परमात्मा को
निहारने वाली निर्मल संवेदना से सम्भव हुआ है।

   हिंदुत्व प्रेम का पर्याय है ,हिंदुत्व बंधुत्व का स्त्रोत है ,हिंदुत्व प्रकाश की लौ है,
हिंदुत्व नर में नारायण की दृष्टि है यदि इस हिन्दुत्व को सांप्रदायिक  कहा जायेगा
तो हमें यह साम्प्रदायिकता हजार बार स्वीकार्य है।  
          
   

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