शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

अजीब आदमी

अजीब आदमी 

एक गाँव में एक विचित्र आदमी ने प्रवेश किया। गाँववालों ने उसके अजीब और
नवीन विचार सुनकर उसे अच्छे निवास में ठहरा दिया। वह आदमी सम्मान
पाकर खुश हुआ और प्रतिदिन विचित्र प्रयोग और विचार रखने लगा। गांववालों
को उसके विचित्र विचार कसौटी पर कसने के योग्य लगे। एक दिन सब
मिलकर उस आदमी के पास गये और बोले -हम आपके विचारों का आदर करते
हैं ,इसलिए आपको अपना आदरणीय मानते हैं। आप उच्च स्थान पर विराज कर
अपने विचारों को सत्य की कसौटी पर कस के दिखाये।

उस आदमी ने ना -नुकर की, जब गाँव वाले नहीं माने तो उच्च आसन की ओर
बढ़ गया और आसन पर बैठ कर विचित्र प्रयोग दिखाने लगा। उसके हर प्रयोग
असफल होने लगे तो वह आसन से उठ कर दौड़ने लगा। उसे दौड़ता देख सब
लोग उसके पीछे हो गये। वह आदमी दौड़ता -दौड़ता गाँव की पानी की टंकी पर
चढ़ गया।

उसने ऊपर से चिल्ला कर गाँव वालों से कहा -मेरे प्रयोग जो मुझे ठीक लग रहे
थे मेने किये ,मगर तुम लोगों का नजरिया सही नहीं था इसलिए मेरे सभी प्रयोग
आप लोगों को असफल लगे। अब मैं आर -पार का प्रयोग करूंगा। मैं अब पानी
की टंकी के ऊपर से सिर के बल गिरूँगा ,यदि जीवित बचा तो आप नेता मान लेना
और मर गया तो शहीद का सम्मान देते रहना।

गाँव वाले निचे खड़े -खड़े ऊपर ताक रहे थे एक बुजुर्ग ने कहा -गाँव वालों, इसकी
आत्म हत्या का पाप हमें भी लगेगा।

एक ने पूछा -हम पाप के भागी कैसे हुए ?

बुजुर्ग ने जबाब दिया -हमने अपनी अक्ल का उपयोग किये बिना इतने दिन
इसके विचित्र प्रयोग पर तालियाँ बजाते रहे इसलिए। यदि हम उसे पहले ही
दिन मुर्ख मान लेते तो यह अवसर नहीं आता।    

कोई टिप्पणी नहीं: