गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

अनुभूत चुनावी नुस्खे

अनुभूत चुनावी नुस्खे

नुस्खे हर कोई जनता है ,प्रयोग करता है और जब फलदायी होते हैं तो अनुभूत
नुस्खे का टैग मार दिया जाता है। लोकतंत्र भी अजब होता है क्योंकि हर नेता
हर नुस्खे को आजमा कर बैतरणी पार करना चाहता है।

   दो कौम में विवाद पैदा करवाना अनुभूत नुस्खा है इसलिए हर छोटा बड़ा
नेता छूट से इसे इस्तेमाल करता है क्योंकि विवाद से गुस्से का जन्म होता है
और गुस्सा दंगे के रस्ते से गुजर कर या खामोश रहकर वोट में बदल जाता है
और वोट से लोकतंत्र साँसे गिनता है।

   फिकरे कसना और ताने मारना भी सफल नुस्खा रहा है ,आम प्रजा को इसमें
रस आता है और जनता को कोई ताना रास आ गया तो हो जाए बम बम। आम
उम्मीदवार खास नेता में बदल जाता है। अभी एक भाई ने नया प्रयोग किया था
ढोल बजा कर पोल खोलने का ,किसी भी नुक्कड़ पर खड़े हो जाओ और ढोल
बजाकर पोल खोलने का स्वाँग रचो ,अगर स्वाँग असली जैसा लगा तो लोक
खुश और लोक खुश तो लोकतंत्र खुश।

पलटी मारना भी अनुभूत नुस्खा है बस जबान और दिमाग पलटने में गजब
कि फुर्ती चाहिए ,हवा का रुख पहचानो और दिशा बदल लो जिसने भी फुर्ती
से बदली कुछ ना कुछ पद पर चिपका दिया जाता है।

 गुट्टी पिलाने का नुस्खा भी रामबाण ईलाज है चुनाव में। कैसी भी गुट्टी हो
गरीबी मिटाने की हो या महँगाई हटाने की सब चलती है। नाव पार लगने पर
कोई परिणाम प्रजा को नहीं भी मिले तो भी अगले चुनावों में वही गुट्टी पुन:
पिला दो ,पूरा असर दिखायेगी ,शर्तियाँ ईलाज है यह।

 भगवान् के नाम के पर्याय शब्द का रटा लगा दो जैसे -राम ,ईसा,खुदा आदि
और पाँच लाईन के भाषण में सब पर्याय को पढ़ दो ,इससे आपकी छबी पर एक
सिक्का लगेगा जिसे लोकतंत्र में धर्मनिरपेक्षता कहा जाता है। यह सिक्का
जो भी लगाने से चुक गया समझो उसका तो डूबना तय है ,नुस्खा यह बताता
है कि एक कसम या वादा जो भी करो इन सबका नाम ले डालो ,हर कौम अपना
बना लेगी और नैया पार लगा देगी।

अनशन और धरना फिर से फैशन में आ गए हैं ,बात बात पर प्रदर्शन करो ,
सड़क पर जोर जोर से समस्या पर गला फाड़ो ,लोग सुनेंगे ,उनकी दुखती
रग को पकड़ो और खुद को मसीहा बताकर रग को दबाओ ,दबाने से जनता
का दर्द हरा हो जाएगा और तड़फड़ा कर बूथ पर ठप्पा लगा देगी और प्रजा
के दुःख से नए लोकयुग का प्रसव होगा जिससे जनसेवक का जन्म होगा ही।

गोल -मोल बातें करो ,बिना परिणाम की कथा सुनाते जाओ,जो कुछ अच्छा
हुआ उसे खुद के खाते में कैसे भी फिट करो और जो भी ख़राब हुआ उसे सामने
वाले के गले में लटका दो।

ये सब करने से भी 272 ना आये तो भी घबराओ मत ,अन्तिम अचूक नुस्खा
अपना लो ,कुछ हरे हरे लक्ष्मीजी के पत्ते हाथ में लो और शम्भुमेले की भीड़
पर उछाल दो ,शर्तियाँ सरकार बना लोगे ,आजमाया हुआ वशीकरण नुस्खा
है सांप नेवले को भी गले मिला देता है।   
        

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