शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

राष्ट्र के लिए परिवार नियोजन जरुरी या संयम

राष्ट्र के लिए परिवार नियोजन जरुरी या संयम 

इस देश की ताकत है या कमजोरी बढ़ती हुई जनसँख्या ? हिन्दुस्थान में घटता हुआ
हिन्दू समाज हिन्दुस्थान के भविष्य को कैसा बनायेगा -रंगहीन या रंगीन ?सवाल
भी हमने बनाया है और उत्तर भी हमें ही खोजना होगा।

   सबसे पहले सरकार के नीति नियन्ता कि बात करते हैं जो बढ़ती हुई जनसँख्या
को समस्या के रूप में देखते हैं जो अपूर्ण नजरिया है हर दृष्टिकोण से। यदि इन
नीति नियंताओं के माँ -बाप ने परिवार नियोजन अपनाया होता तो आज वो किसे
नसीहत देते ?

  यदि कम संतान पैदा करना सही नीति मान ली जाए तो आज के पचास वर्ष बाद
हिन्दुस्थान का क्या हाल होगा -किसका भाई सेना में जायेगा ,कौन पिता के बुढ़ापे
का सहारा बनेगा ,कौन परिवार की व्यवस्था और अर्थ व्यवस्था देखेगा क्योंकि हम
एक या दो संतान के पक्ष में मत दे रहे हैं और इस फिसलन भरे रास्ते पर आगे
बढ़ना चाहते हैं और बढ़ भी रहे है। 

परिवार नियोजन ने कई माँ बाप को जिंदगी भर सिसकने को मजबूर कर दिया है।
वो माँ -बाप जो एक लड़के और एक लड़की के बाद परिवार नियोजन अपना चुके
हैं और उनकी संतान किसी हादसे या बिमारी के कारण जान गवाँ चुकी है या
अपाहिज हो चुकी है उनका भविष्य अँधेरे में आ गया और वर्त्तमान बेजान हो गया,
रसहीन हो गया ,बदरंग हो गया।  

परिवार नियोजन से लिंग अनुपात गड़बड़ा गया,किसी के एक लड़का और एक लड़की
है तो किसी के दो लड़के ,दॊ लड़कियाँ वाले माँ -बाप काफी कम हैँ। अब इन बच्चों में
से कोई अपाहिज ,बीमार या हादसे का शिकार हो गया तो यह अनुपात ज्यादा बिगड़
जाता है।

हम गलत तरीके से सृष्टि को रोकना क्यों चाहते हैं ?क्या हम खुद को सृष्टि का संचालक
मानते हैं ?हर बच्चे में दिमाग होता है ,हम आने वाले बच्चे को रोक कर बड़ी प्रतिभा को
आने से पहले ही रोक देते हैं क्या मालुम आने वाला बच्चा बड़ा वैज्ञानिक बनता या बड़ा
डॉक्टर या समाजसेवक या राजनेता।

परिवार नियोजन ने नागरिकों को ओज और तेजहीन तथा असंयमी बना दिया। परिवार
नियोजन से पहले यदि कोई माँ -बाप बच्चा नहीं चाहते थे तो संयम का पालन करते थे ,
संयम से उनका स्वास्थ्य सुन्दर बना रहता था।

राष्ट्र को सोचना होगा कि परिवार नियोजन या संयम ,कौनसा रास्ता देश के हित में है,
कौनसा रास्ता शास्त्रोक्त है,कौनसा रास्ता सृष्टि संचालन के लिए उपयुक्त है। देश के
नागरिकों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दो ताकि वो खुद निर्णय ले कि उसे कितनी संतान
चाहिये।   

  

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