रविवार, 16 मार्च 2014

मोदी की राजनीति और कांग्रेस की भूलें

मोदी की राजनीति और कांग्रेस की भूलें 

चुनाव 2014 का घमासान शुरू हो चूका है और सभी दलों की राजनैतिक उठापठक भी।
एक बात सामने है कि हर दल का निशाना मोदी है। क्या मोदी का व्यक्तित्व वर्त्तमान
समय में इतना बड़ा हो चूका है कि सभी दल उस पर वार करना चाहते हैं,क्यों ?विश्व
की महासत्ता भी मोदी से क्यों कांप रही थी ?विश्व के कुछ शक्तिशाली राष्ट्र मोदी को
आँख दिखा कर आज "नमो" जाप करने लग गये हैं ,क्यों ?क्या खास है मोदी की
राजनैतिक शैली में।

आज गुजरात में विपक्ष मटियामेट हो चूका है ,कांग्रेस के बड़े -बड़े गढ़ गुजरात में
धराशायी हो गए हैं और इस बार के चुनाव में काँग्रेस अपना खाता भी खोल ले तो
बड़ी बात होगी ,इसका मतलब काँग्रेस गुजरात में अपनी प्रासंगिकता खो रही है ,
एक मायने में देखा जाये तो यह काँग्रेस की तुष्टिकरण की नीति का दर्दनाक हश्र
है। तुष्टिकरण के अँधेरे में काँग्रेस धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करती रही उसके कारण
एक बड़ा समुदाय मोदी के साथ हो गया जो मजबूती से उसके साथ जुड़ा। काँग्रेस
2002 के दंगे के बाद के दर्द को एक पक्षीय अन्याय के रूप में आज तक प्रचारित
करती रही जिसका कुप्रभाव यह पड़ा कि वह पिछले दस सालों में सिमटती चली
गयी ,काश !काँग्रेस 2002 का दंगा के पहले के हालात पर घोर कर लेती और
बेगुनाह जला दिए लोगों पर निष्पक्ष निर्णय करती तो स्थिति कुछ और होती।
कांग्रेस की इस चूक का फायदा मोदी जी को अनायास मिल गया और मोदीजी ने
गुजरात को भाजपा का अजेय किला बना दिया।

काँग्रेस ने ठोस काम करने की जगह लोकलुभावने काम को महत्व दिया जबकि
वे जानते थे कि वे अपव्यय कर रहे हैं क्योंकि जो धन जनता के लिए खर्च होना
था उन योजनाओं से वह लूटेरों के हाथ में जाता गया और आम जनता खाली हाथ
रह गयी। रोजगार गारंटी,भोजन की गारंटी,बढ़ते हुये वेतन और भत्ते,घटती हुयी
डीजल -गैस तथा खाद बीज सब्सिडी,लुप्त होते रोजगार के अवसर,मूल्य खोता
रुपया,बेलगाम महँगाई के कुचक्र में काँग्रेस धँसती चली गयी और आम जनता
त्राहिमाम पुकार उठी ,आम जनता के दर्द को समझने के प्रयास की जगह काँग्रेस
नेताओं के बयान जनता के दर्द को सालों से बढ़ाते रहे। नतीजन काँग्रेस खुद के
बनाये जाल में फँसती गयी और इस नाकामी को मोदीजी ने बढ़िया तरीके से
देश के सामने रखा और जनता के सामने विकल्प के रूप में खुद के गुजरात में
किये विकास के कामों को रख दिया। काँग्रेस की अर्थनीति की विफलता ने मोदी
के विकास के झंडे को फहराने में भरपूर मदद की और आज वो विकास का झंडा
लेकर फहरा रहे हैं।

UPA की सरकार गठबंधन कि थी जिसका नेतृत्व काँग्रेस करती है और जो
नेतृत्व करता है उसे ही सबसे ज्यादा कुफल भोगने पड़ते हैं क्योंकि आम जनता
के लिए वही दल खलनायक होता है। कांग्रेस की एक बड़ी भूल यह रही कि उसने
यह मान लिया कि भारत में एक दल की सरकार के जमाने लद गए हैं उसने इतने
वर्षों में केवल इतना ही श्रम किया कि वह अन्य दलों के सहारे खड़ी होकर सरकार
का नेतृत्व करती रहे उसका परिणाम यह हुआ कि उसने सत्ता तो प्राप्त कर ली मगर
अपनी ताकत नहीं बना पायी ,जब टेका देने वाले दलों ने देश की तिजोरी का धन
लूटना शुरू किया तो वह सत्ता बचाने के चक्कर में आँखे बंद करके बैठ गयी। काँग्रेस
की  इस चुप्पी ने मोदी को उसे ललकारने का मौका दे दिया ,परिस्थिति यह बनी कि
देश लूटता गया ,काँग्रेस बचाव में मौन रही और उसके खुद के नेता भी तिजोरी को
लूटने के मौके बनाते गये ,जब काँग्रेस के नेता भी भ्रष्ट आचरण के दोषी साबित
होने लग गये तो मोदी गरजने लग गये। AAP का भी जन्म इसी कारण हुआ।

UPA की  विदेश नीति की विफलता,सीमाओं पर पडोसी देशों की मनमानी ,गिरता
हुआ सैनिक मनोबल,बढ़ती हुयी घुसपैठ ,आतंक का मँडराता साया ,यह सब चलता
रहा और काँग्रेस के नेता जबाबी कार्यवाही की जगह जबान चलाते रहे इसका हर
भारतीय पर गलत असर पड़ा और मोदी ने अपने राज्य कि कानून व्यवस्था को
दुरस्त रखा और काँग्रेस की नाकामयाबियों को हर मंच से देश को बताते रहे,इससे
लोगों का मन मोदी मय हो गया।       
           

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