शुक्रवार, 21 मार्च 2014

तिजोरी की चाबी

तिजोरी की चाबी

शाम के समय बगीचे में घूमने आये दोस्त ने दूसरे दोस्त को उदास देख कर पूछा -
आज बहुत उदास और खिन्न से हो ,क्या कोई चिंता सता रही है क्या ?

दूसरे ने जबाब दिया -यार ,कमाते -कमाते बुढ़ापा आ गया ,जो कुछ बचाया उसे 
सँजोकर रखा है मगर बेटा बोलता है तिजोरी की चाबी सौंप दो। अब बता यह कैसे 
सम्भव है और इस तिजोरी की चाबी की वजह से हर दिन अशांति है। 

पहले ने पूछा -बच्चा क्या कमाता है ?

दूसरा बोला -अच्छा खासा व्यापार चल रहा है ,सब सुख सुविधा है घर में लेकिन 
ना जाने क्यों उसकी नजर मेरी तिजोरी पर गड़ी है। एक बात बता ,तूने अपनी 
बचत को कैसे सहेज कर रखा है। 

पहला बोला -मेने जो कुछ बचाया ,बच्चे को यह कर थमा दिया कि इस तिजोरी 
की पहरेदारी अब मैं नहीं करूँगा ,अब तुम जबाबदारी सम्भालो और मुझे बुढ़ापे 
को निश्चिंतता के साथ जीने दो बस बच्चे को जबाबदारी समझा मैं मस्ती से 
बुढ़ापा गुजार रहा हूँ। 

अपने मित्र का उत्तर सुन पहले ने तिजोरी की चाबी को कस के पकड़ लिया और 
चिंता में लीन हो गया।  

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