रविवार, 23 मार्च 2014

चिड़ियाँ से सीख

चिड़ियाँ से सीख 

चिड़ियाँ ने छोटे से रोशन दान पर अपना अड्डा जमा लिया था ,बाहर से घास ,पत्ते,
तिनके लाकर घोंसला बना लिया और कुछ दिन बाद एक अंडा भी दे दिया। कई 
दिनों तक चिड़ियाँ अंडे को सेती रही। कुछ दिनों के अंतराल के बाद अंडे से चूजा
बाहर निकला। चिड़ियाँ और चिड़ा उसकी देखभाल में लगे रहते। ममता और दुलार
पर सिर्फ मनुष्यों का ही अधिकार नहीं होता ,सृष्टि में सभी प्राणी अपने बच्चों को
दुलार देते हैं। चिड़ियाँ और चिड़ा नन्हें से बच्चे के साथ चीं -चीं करते रहते।

एक सुबह चिड़ियाँ ने छोटे से बच्चे को रोशनदान से धक्का दिया ,बच्चा लड़खड़ा
कर फड़ फड़ाता हुआ जमीन पर गिर पड़ा। चिड़ियाँ और चिड़ा उस नन्हें के साथ जोर
-जोर से ची -ची करने लगे। मुझे उस नन्हें से बच्चे पर दया आ गई ,मेने उस बच्चे
को उठाकर वापिस रोशनदान पर बने घोंसले पर रख दिया। दूसरे दिन भी चिड़ियाँ
ने फिर वैसा ही किया बच्चे को घोंसले से निचे धकेल दिया। चिड़ियाँ का बच्चा बड़ी
मुश्किल से फुदकता हुआ एक कोने में बैठ गया। वह भय के मारे बुरी तरह से काँप
रहा था  दूसरे दिन भी मेने फिर से उसे उठाया और रोशनदान पर रख दिया।

तीसरे दिन चिड़ियाँ ने फिर धक्का दे दिया ,बच्चा हल्के से फुदकने लगा। चिड़ियाँ
और चिड़ा उसे फुदकते देख चीं -चीं करने लगा। मुझे आज चिड़ियाँ के निर्दयी व्यवहार
पर गुस्सा आ गया। मेने उनको उड़ाकर बच्चे को पकड़ कर घोंसले में बिठाने की कोशिश
की मगर आज बच्चा बार -बार छोटी उड़ानें भरने लगा ,बड़ी मुश्किल से बच्चे पर
काबू पाकर उसे फिर से घोंसले में बिठाया।

अगले दिन चिड़ियाँ बार -बार बच्चे को घोंसले से धक्के देकर निचे धकेलने लगी पर
आज वह बच्चा निचे नहीं गिर कर छोटी उड़ाने भरने लगा। एक  दौ दिन बाद मेने देखा
कि चिड़ियाँ ने छोटे से घोंसले को बिखेर दिया। आज वहाँ सन्नाटा था ,ना तो बच्चा था
और ना ही चिड़ियाँ। वे सब उड़ चुके थे। ये सब देख मुझे लगा कि हम मनुष्य बुद्धिमान
होते हुए भी चिड़ियाँ से कम हौसला रखते हैं ,हम अक्सर बच्चों को जोखिम लेने के लिए
तैयार ही नहीं करते हैं।

हम बच्चों की परवरिस के नाम पर सुरक्षा का घेरा बनाते रहते हैं और उसे हर
साल मजबूत करते रहते हैं। हम खुद बच्चे के सुखद भविष्य के लिए प्रयासरत
रहते हैं मगर बच्चों को जोखिम से खेलने के लिए तैयार नहीं करते ,क्यों ?
क्या हम चिड़ियाँ से भी ज्यादा डरपोक अभिभावक हैं या फिर काल्पनिक भय से
डरते रहते हैं ? कहीं हम मार्ग दर्शन की जगह सुरक्षा घेरा बनाकर बच्चे के भविष्य
को कमजोर तो नहीं कर रहे हैं   ……………      

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