रविवार, 30 मार्च 2014

विस्थापित कश्मीरी और गूँगे नेता

विस्थापित कश्मीरी और गूँगे नेता 

विचित्र नाम है धर्म निरपेक्षता ,हमारे देश के वोट बैंक परस्त नेता इस लिबास से खुद
को ढके रहना पसँद करते हैं ,तुष्टिकरण के रास्ते पर बढ़ती हुयी धर्म निरपेक्षता गन्दा
नाला बन रही है और उसकी इस बदबू से हर कौम बेहाल है। कोई नेता अपनी वोट बैंक
को खुश करने के लिए किसी अन्य नेता को "नपुँसक "कहता है तो कोई जबरदस्ती
"धार्मिक टोपी "पहनाना चाहता है तो कोई नेता वोटबैंक को चरमपन्थ की ओर धकेलता
हुआ "आतँकी सोच" की आग बरसाता है। अपने को धर्म निरपेक्ष कहने वाली पुरानी पार्टी
किस प्रकार की सोच रखती है यह देश देख भी रहा है और भुगत भी रहा है। जब देश का
प्रधान भी वोटबैंक के मोह में राजधर्म भूल कर तुष्टिकरण वाली सोच को सरे आम यह
कह कर प्रगट करता है कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ वोटबैंक वाले समूह का है
तो समानता की आशा खत्म हो जाती है।

 उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय दल,बिहार के क्षेत्रीय दल ,आसाम के क्षेत्रीय दल और बंगाल के
क्षेत्रीय दल सब के सब दोगली वाणी और दोगला आचरण रखते हैं। एक भारतीय से
सौतेला व्यवहार और दूसरे से वोटबैंक के कारण तुष्टिकरण का व्यवहार। इन प्रदेशो
में केवल दंगे ,गरीबी ,धार्मिक और सामाजिक कटुता की फसल पकती है। बहु संख्यक
में जातिगत फूट पैदा करना और वोटबैंक को विकास की मुख्य धारा से अलग -थलग
रख कर शासन चलाना यही इनकी नीति रही है।

नयी नयी राजनीति में आयी पलटू की सोच भी इन पार्टियों जैसी ही है ,वोटबैंक को
बनाने के चक्कर ये तो राष्ट्र विरोधी विचार भी खुल कर बकते हैं इनके पास कश्मीरी
विस्थापितों के दर्द के लिए शब्दों की सहानुभूति भी नहीं है मगर कश्मीर पर जनमत
संग्रह कराने की वकालात जरुर करते हैं।

बहुसंख्यक हित की रक्षा की बात करना आज कितनी पार्टियों को सुहाता है ?वोट बैंक
का अनुचित हित साधने के लिए ये सब तत्पर रहते हैं ?क्या विस्थापित हुए कश्मीरी
लोगों के लिए इन पार्टियों ने कभी कोई वादा भी किया है,कभी संवेदना भी जतायी है ?
क्या गुनाह था इनका जो आज भी अपने देश में विस्थापित की तरह जीना पड़ता है ?
देश के आतंकियों के जनाजे पर आँसू बहाने वाले तथाकथित निरपेक्ष नेताओं की
आँखे उस समय क्यों सूख जाती है जब विस्थापित कश्मीरियों के हक़ की बात आती है ?
ये मानवाधिकार की बातें करने वाले भद्र कहलाने का शौक रखने वाले लोग तुष्टिकरण
के पक्ष में घंटो बहस करते हैं मगर कश्मीरी विस्थापितों के हक़ की बात नहीं करते हैं।
प्रशांत भूषण जैसे लोग इन पण्डितों के दर्द को भूल कर कश्मीर पर क्या बयान देते हैं
यह हर राष्ट्रवादी को याद है।

इस चुनाव में हम राष्ट्र के लिए वोट करें ,विस्थापित भाइयों के दर्द को दूर करने के लिए
वोट करे,देश से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए वोट करे,आतँकवादी सोच से लड़ने के
लिए वोट करे,हर भारतीय को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वोट
करे ,शांति और सुरक्षा के लिए वोट करे,जिन लोगो ने देश को सिर्फ वादे दिए हैं हम
भी उन्हें सपना ही दिखाए और वोट विकास के लिए करे।             

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