रविवार, 30 मार्च 2014

निरन्तरता

निरन्तरता 

हथोड़े की पहली चोट खाकर बड़ी चट्टान ने भयँकर अटटहास किया और नन्हे से 
हथोड़े से व्यंग से पूछा -तेरे नन्हे से शरीर पर चोट तो नहीं लगी ना ,मुझ पर प्रहार 
करके तेरा अस्तित्व ही मिट जायेगा। 

हथोड़े ने जबाब दिया -मुर्ख चट्टान ,मैं जानता हूँ कि तुम बहुत बड़ी हो और मैं बहुत 
छोटा सा हूँ मगर मेरी छोटी चोटे जब निरंतर तेरेपर पड़ेगी तब तुम चकनाचूर हो 
जाओगी। इतना कहकर हथोड़े ने सतत चोट करना चालु रखा।  कुछ समय बाद 
चोट खा -खा कर चट्टान चटखने लग गयी और अपना अस्तित्व खो बैठी। 




  हर समस्या और मुश्किल आरम्भ में हमें डराने की कोशिश करती है उसकी विकरालता को देख कर हम खुद पर संदेह करने लग जाते हैं हम में से ज्यादातर हार मान कर ध्येय बदलने की क्रिया अपना लेते हैं यानि मुश्किलों को खुद पर हावी होने देते हैं। बहुत कम लोग खुद परविश्वास रखते हैं और समस्या पर निरन्तर चोट करते हैं मगर जो लोग आत्म विश्वास के साथ सतत प्रयास करते हैं उनको हम सफल व्यक्ति कहते हैं। सतत प्रयास करते रहने से मुश्किलें आसान बन जाती 
है और हमें आगे बढ़ने का रास्ता दे जाती है। 

चिंता नहीं ,लगातार प्रयास।     (चित्र :गूगल से साभार)

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