गुरुवार, 6 मार्च 2014

गुजरात धरने और पथराव से आगे नहीं बढ़ा है नेताश्री !

गुजरात धरने और पथराव से आगे नहीं बढ़ा है नेताश्री !

नेताजी गुजरात का विकास देखने के बहाने आये मगर उनके मन में खोट भरी थी
जिसे गुजरात की चतुर जनता ने पहचान लिया क्योंकि गुजरात की जनता पाटेकर के
अनगिनत मोरचे देख चुकी है और उसके कारण करोड़ो का खर्चा (विलम्ब के कारण
से बढ़ा उसे) भुगत चुकी है ,गुजरात का विकास देखना है तो चश्मा बदले,नजरिया
बदले,मन और आत्मा को शुद्ध करे,बदले।  कोई व्यक्ति जिस भी उद्देश्य से आया है उसे
अपना आने का उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए ,मुंह में राम और बगल में छुरी रख
कर गुजरात के अमन को आग लगाने की कोशिश करने वाले लोग वर्त्तमान में
अपनी साख और पहचान दोनों खो चुके हैं इस गुजरात की धरती से ।

   खुली सड़क पर आप जो चाहे बक दे और जुजारु प्रजा उसका विरोध ना करे ,आपने
गुजरात की प्रजा को मुर्ख समझा है क्या? गुजरात के विकास को देखने के लिए बुद्धि
चाहिए ,आप अपना स्वार्थ साधने के लिए गुजरात को धरने का ,पथराव का मन्त्र
देने आये हैं तो वापिस लौट जाइये क्योंकि गुजरात मेहनत और पुरुषार्थ के रास्ते पर
चल रहा है। गुजरात के विकास की पोल खोलने आये हैं ना आप ,यानि हमारे ही मेहमान
बनकर हमारा ही अपमान करना चाहते हैं ,आपको छह: करोड़ गुजरातियों की मेहनत
और पुरुषार्थ ढ़ोंग लगता है ?आप समझते क्या हैं खुद को ?क्या गुजरात के शान्त जल
में कंकड़ फैंकने आये हैं ?गुजरातियों को बेवकूफ बनाने की कोशिश मत करिये क्योंकि
गुजरात विकास करने वालों को और जबाबदारियों से भाग छूटने वाले कायरों को
पहचानता है। गुजरात में जब भूकम्प आया था तब आप कहाँ थे ?गुजरात जब बाढ़
से त्रस्त था तब आप कहाँ थे ?गुजरात जब प्राकृतिक आपदाओं से त्रस्त था तब आप
कहाँ थे ?गुजरात पर आतंकी हमला हुआ तब आप कहाँ थे ?आप झूठे और छली
समाज सेवको के साथ हैं ना ? अपना कौनसा रूप दिखने आये हैं?झूठी धर्म निरपेक्षता
के काँटों से गुजरातियों को लहुलुहान करने का इरादा तो नहीं हैं ना आपका ?

गुजरात की प्रजा सबसे पहले भारतीय गुजराती है,यहाँ हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई
को आपस में बाँट कर लड़ाने वाली दुकानो के शटर गिर चुके हैं। हमें विकास के
अलावा किसी में भी रूचि नहीं है। आपको कर दिखने का मौका दिया गया लेकिन
आप रणछोड़ बन गए क्योंकि काम करने में तपस्या, श्रम और समय लगता है लेकिन
आप ठहरे बड़बोले शँख ,आप काम नहीं करना चाहते थे और जो कर रहा है उसकी
गलतियाँ सूँघते फिरते हैं,यह अजीब राष्ट्र धर्म निभा रहे हैं आप ?भले ही हमारा गुजरात
छोटा प्रदेश है मगर जबाबदारियां बड़ी उठाने का हौसला रखता है। हम सब मिलकर
अपने प्रदेश को बेहतर बनाने में लगे हैं ,सर्वांगीण विकास में लगे हैं ,हम दशकों से
अमन चैन के दीप को रोशन किये हुए हैं और आप हैं कि जलते हुए दीप को फूँक मार
रहे हैं। खबरदार  …।

गुजरात में आपका स्वागत है इसका मतलब यह नहीं कि गुजराती प्रजा के काम का
मखौल उड़ाओ। अरे! नेताजी ,हम तो हर भारतीय से आशा करते हैं कि वह कुछ दिन
तो गुजारे हमारे गुजरात में ,हमारे विकास के हवन में हर भारतीय को आहुति देने का
अधिकार और निमंत्रण है मगर हमारे यज्ञ को नष्ट करने का अधिकार किसी को नहीं है 
गुजरात में सबका स्वागत है जो इसको जोड़ने और मजबूत बनाने के लिए आता है
इसलिए तो यहाँ देश के हर प्रदेश के वासिंदे हमेशा -हमेशा के लिए बस रहे हैं। 
          

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