बुधवार, 2 अप्रैल 2014

छोड़े और पकड़ें

छोड़े और पकड़ें 

सुख और दुःख को समझने के लिए एक व्यक्ति ऋषियों ,विद्वानों और ज्ञानियों 
की खोज में भटक रहा था मगर उसे संतोष जनक उत्तर नहीं मिल पाया था। 

भटकते -भटकते उसकी भेंट एक किसान से हो गयी। किसान ने उससे भटकते 
फिरने का कारण पूछा तो उसने अपना प्रश्न बता दिया। किसान ने कहा -यदि 
एक महीना तुम मेरे पास रहो तो तुम्हे इसका हल मिल जायेगा। वह व्यक्ति 
किसान के पास रुक गया। किसान हर रात उसके पास आता और उसको 
चंद्रदेव का दर्शन करने को कहता। एक महीना बीत जाने के बाद उस व्यक्ति 
ने किसान से अपने प्रश्न का हल पूछा तो किसान ने कहा -तुमने पुरे एक 
महीने तक चन्द्रदेव का दर्शन किया ,तुमने चंद्रदेव में क्या देखा ?

वह व्यक्ति बोला -पन्द्रह दिन तक चन्द्र का स्वरुप क्षीण होता गया और अगले 
पंद्रह दिन में स्वरुप पूर्णता प्राप्त करता गया। 

किसान बोला -इसी स्वरुप में तेरे प्रश्न का उत्तर निहित है ,हम पंद्रह दिन अपनी 
बुराइयाँ छोड़ने में लगाये और अगले पन्द्रह दिन सद्गुणो के विकास में बिताये। 
बुराइयों का क्षीण होना ही सुख है और सदगुणों का क्षीण होना ही दुःख है। 
बुराइयों को प्रयत्न पूर्वक छोड़े और सद्गुणों को प्रयत्न पूर्वक पकडे ,सुख -दुःख को 
समझने का यह सरलतम उपाय है।  
  

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