गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

मतदान को अवसर में बदलने का समय

मतदान को अवसर में बदलने का समय 

राष्ट्र के सामने रास्ता चुनकर आगे बढ़ने का समय है और समय को अवसर में बदल 
देने का मौका हर वोटर के हाथ में है ,हम अपने अधिकार का सदुपयोग और दुरूपयोग 
करने को स्वतंत्र हैं मगर इसके परिणाम भी हम खुद ही पाने वाले हैं इसलिए वोट 
देने से पहले राष्ट्र की अस्मिता पर विचार करना,अपने कर्तव्य पर विचार करना ,राष्ट्र 
वाद पर विचार करना। वोट देने से पहले इतना जरुर सोचना कि -

भारत में भुखमरी के लिए जिम्मेदार कौन है ?

भारत में भ्रष्ट राजनीति का पोषण कौन कर रहे हैं ?

भारत की राजनीति में विभिन्न धर्मावलम्बियों में फूट और सन्देह पैदा करके 
लड़ाने से किनका स्वार्थ पूरा हुआ ?

धूर्त ,कुबुद्धि,पाखण्डी,पक्षपाती ,अराजक ,शक्तिहीन ,अहँकारी ,ढोंगी और कामी को 
वोट का दान ना करे क्योंकि कुपात्र को दिया गया दान व्यर्थ का कर्म होता है ,इससे 
अच्छा है मत का उपयोग नहीं करे यदि आवश्यक लगे तो जो कम दुर्गुणी हो उसे 
वोट दे दे।

बदलाव का अर्थ यह नहीं कि खोटी उठा पटक करो ,बदलाव को उन्नति और विकास से 
जोड़कर देखो। बार बार वादा खिलाफी करने वाले, कहकर मुकरने वाले,कथनी करनी 
में अंतर रखने वाले निरंकुश लोगो के हाथ में शासन मत सौंपो। 

राष्ट्र की सरहदों की असलामती, अन्य राष्ट्रों की गुलामी और जी हजूरी, राष्ट्र के लिए 
अनर्थकारी नीति निर्माण, राष्ट्र मे आंतरिक अव्यवस्था, सद्भाव की जगह पक्षपात,
राष्ट्रिय सम्पदा की लूट खसोट और कमरतोड़ राजस्व की वसूली ने हमको गहरी 
खाई में धकेला है इसके लिए जिम्मेदार कौन ?क्या फिर से उनको वोट करना हमारी 
राष्ट्रभक्ति होगी ?सोचो ,सोचो ! वोट करो ,सब को जागृत करो ,देश भक्त सरकार चुनने 
का समय आया है ,अपने एक एक वोट से राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बनो।            

    

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