रविवार, 13 अप्रैल 2014

धर्म विहीन राजनीति या राजनीति विहीन धर्म

धर्म विहीन राजनीति या राजनीति विहीन धर्म 

देश को क्या चाहिये -धर्म विहीन राजनीति या राजनीति विहीन धर्म ?

धर्म विहीन राजनीति किस काम की ? जिस तरह आत्मा बिना शरीर कुछ काम
का नहीं होता है उसी तरह धर्म तत्व के बिना राजनीति कैसी ?
इस देश के नेता हर दिन धर्म विहीन राजनीति की बात करते हैं जब -जब भी
राजनीति से धर्म का लोप हुआ है तब -तब अनाचार ,अत्याचार ,अनैतिकता
को बढ़ावा मिला है और उस अनैतिकता को परास्त करने के लिए हर युग में
धर्मयुद्ध लड़ा गया है। आज देश पीड़ा में है क्योंकि राज नेतृत्व की सोच बदल
गयी है आज के नेता अब जनता पर धर्म विहीन राज कर रहे हैं ,जब शासक
धर्म विहीनता की बात करता है ,धर्म विहीनता की पैरवी करता है तब देश
में अराजकता का राज हो जाता है।
धर्म मानवीय जीवन मूल्यों का सरंक्षण करता है ,संस्कृति की रक्षा करता है
सद्गुणों का पोषण करता है। धर्म मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा रहता है। धर्म
परोपकार ,मैत्री ,दया ,क्षमा ,करुणा और सद्भाव जैसे दैवीय गुणों को आचरण
में लाना सिखाता है अगर हम धर्म विहीन हो जायेंगे तो राक्षस बन जायेंगे और
राजनेता धर्म विहीन हो जायेंगे तब जनता शोषित और दुःखी हो जायेगी।
यह कटु सत्य है कि आज के नेता धर्म विहीन राजनीति करते हैं और इसी कारण
से देश भ्रष्ट शासक वर्ग से बेहाल है। जब शासक वर्ग में नीति ना होगी तो उच्च
जीवन मुल्य की कल्पना भी खत्म हो जायेगी। आज ज्यादातर नेता धर्म निरपेक्षता
की बात करते हैं मगर देश फिर भी बेहाल है ,क्यों ?
आज समय की मांग है धर्म से रक्षित राजनीति की। हमारे देश के नेताओं को धर्म
का पालन और अनुसरण करना असहज लगता है इसलिए राजनीति से धर्म को
हटाकर धर्म के प्रतीक चिन्हों पर शठ नीति कर रहे हैं धर्म की जगह मतवाद को
पंथवाद को बढ़ावा देकर खून खराबा करवा रहे हैं जो देश को गर्त में धकेल रहा है.

देश को चाहिए राजनीति विहीन धर्म। धर्म के नाम पर राजनीति का कुचक्र सालों
से देश पर लाद दिया गया है। धर्म में राजनीति घुसा कर स्वार्थ पूरा किया जा रहा
है। अगर नेता लोग धर्म को धर्म रहने दे और उसमें कुचेष्टा ना करें तो वो ज्यादा
कुछ नहीं करते हुए भी बहुत कुछ देश के लिए कर देंगे। अगर धर्म में राजनीति
ना होगी तो तुष्टिकरण खत्म हो जायेगा,सर्व धर्म समभाव  रहा तो पंथवाद पर हो
रहा खराबा खत्म हो जायेगा और मतावलम्बियों को मद्देनजर रख कर बनने वाली
निकृष्ट नीतियाँ बंद हो जायेगी। क्या खुद को सेक्युलर जमात के नेता समझने वाले
आयना लेकर एक बार खुद को निहारेंगे और धर्म के नाम पर राजनीति करना बंद
करेंगे ?

देश की माँग है धर्म युक्त राजनीती की। समय परिवर्तन के रास्ते से गुजर रहा है और
हर बालिग़ समझदार नागरिक को अवसर दे रहा है ,यह अवसर चूक गए तो फिर
धर्म विहीन राजनीति होगी ,भ्रष्ट शासक होंगे। समय देश वासियों को भाग्य विधाता
बनने का अवसर दे रहा है और राष्टवाद का सपना दे रहा है ,आओ हम सब मिलकर
राष्ट्र भक्त नेता को चुने और धर्म की संस्थापना के लिए वोट का उपयोग करे।    

कोई टिप्पणी नहीं: