रविवार, 6 अप्रैल 2014

व्यवस्था परिवर्तन की ओर हिन्दुस्थान

व्यवस्था परिवर्तन की ओर हिन्दुस्थान 

हमें बहुमूल्य मानव  रत्न गँवाने के बाद आजादी मिली मगर सुराज्य नहीं मिला,
सुराज्य नहीं मिलने के पीछे जो कारण रहे हैं उनमें शासक वर्ग की खोटी नीतियाँ 
जिम्मेदार है -
बहुसंख्यक वर्ग की घोर अवहेलना 
बहुसंख्यक वर्ग में फूट डालना और वैमनस्य बढ़ाना 
पूजा -पद्धति और ईष्ट के आधार पर बहुसंख्यक वर्ग के टुकड़े करना 
जन्म और जाति के आधार पर गरीबी के मापदण्ड तय करना और आरक्षण देना 
अल्पसंख्यकों को झूठा भय दिखाना 
अल्पसंख्यकों को समान नागरिक अधिकार से दूर रख कर मुख्यधारा से अलग 
रखना 
अल्पसंख्यको को विकास की जगह तुष्टिकरण का झुनझुना थमा देना 
आम जनता पर छुपे कर लगा कर उन्हें निरन्तर गरीब बनाये रखना 
पूंजीपतियों को औद्योगीकरण के नाम पर भारी सब्सिडी देकर कर से प्राप्त आय 
का दुरूपयोग करना 
व्यवस्था के नाम पर अफसर शाही थोपना 
कानून के सरलीकरण की जगह पेचीदा और अधूरा बनाये रखना जिससे भ्रष्ट 
व्यवस्था को पोषण मिलता रहे 
आदर्श चरित्र और देश हित में निर्णय लेने वाले नेताओं का अकाल 
शिक्षा में गुणवत्ता का अभाव 
लघु उद्योगो के विकास की नीति का अभाव 
स्वास्थ्य सेवाओं की फोरी हालत 
कृषि क्षेत्र में उन्नत बीज और नयी तकनीक का अभाव 
चिलाचालु सामाजिक विकास की योजनाये 
 क्या इन बीमार नीतियों से विकसित भारत तैयार होगा ?बदलनी है देश की 
तस्वीर तो सबसे पहले जागरूक बनो और व्यवस्था परिवर्तन का इरादा रखने 
वाले शेरो का चुनाव करो और 100 %मतदान करो। अब तक के सड़े गले शासन 
से छुटकारा पाओ ,सुराज का दिखावा करने वाले धूर्तों को रास्ता दिखाओ और 
जो निष्ठां से देश सेवा में लगे हैं उनके स्वर को बुलँद करो।  
 

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