रविवार, 18 मई 2014

हाँ ,यह हिँदुत्व की जीत है।

हाँ ,यह हिँदुत्व की जीत है। 

2014 के चुनाव परिणाम का निष्कर्ष यही है कि यह हिंदुत्व की जीत और छद्म
धर्म निरपेक्षता के दानव की वध कथा है। यह मेरी कट्टर सोच नहीं है क्योंकि
हिन्दुत्व  सर्वधर्म सद्भाव और समभाव की विरासत से लबालब है। स्वतंत्र
भारत के नेताऑ की नई जमात ने फिरंगी नीति पर ही काम किया। देश में
फुट डालो और राज करो की नीति ने राष्ट्रवाद ,राष्ट्र प्रेम और आर्य संस्कृति को
मटियामेट कर दिया। हिन्दू जातियों को जन्म के आधार पर तोड़ने का काम
हजारों वर्षों में नहीं हुआ उतना 60 वर्ष में हुआ। अनपढ़ और गरीब कुचले हिन्दू
अपने सर्वांगीण विकास के लिए देश के मति भ्रष्ट नेताओ के साथ हो गये और
मुस्लिम वर्ग को हिंदुऑ का झूठा भय दिखाकर उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा से
अलग रख वोट बैंक बना डाला ,मतिभ्रष्ट नेताओं की इस नीति ने उन्हें सत्ता का
सुख दिया मगर देश कंगाल होता गया। सोने की चिड़ियाँ फड़फड़ाती रही।

नास्त्रेदम की भविष्यवाणी थी की एशिया की धरती से एक भगवा सन्त आयेगा
जो विश्व को नयी प्रेरणा देगा ,हम लोगों ने उसे किवदंती मान लिया मगर समय
अपना काम करता है। जब प्रकृति ने वैरागी संत को वापिस जन -जन के कल्याण
के लिये पून: समाज को समर्पित कर दिया तो वह संत सेवा में निस्वार्थ भाव से
लग गया ,विरोधियों ने उस पर नाना तरह के आरोप लगाये,विदेशी ताकतों ने उसे
गिराने की भरपूर कोशिश की मगर दैव उस संत के साथ खड़ा हो गया।

देश ने 16 मई 2014 में अद्भुत युग परिवर्तन देखा। यह युग परिवर्तन जातिवाद के
खिलाफ था,तुष्टिकरण की कुत्सित राजनीती के खिलाफ था ,देश का राष्ट्रवादी समाज
संगठित हो गया क्योंकि वह जाति और आराधना पद्धति पर चल रही राजनीति से
ऊब गया था उसे रोटी, रोजगार और रक्षा चाहिये थी और उसके लिए वह घर से
बाहर निकला और अपने मत के अधिकार का उपयोग किया। फिर वही हुआ जो
विश्व अचम्भे से देख रहा है और अपने उलझे समीकरण सुलझा रहा है ।

हिँदुत्व के इस नये युग में हिँदुत्व अपनी मूल व्याख्या में आयेगा। परहित चिंतन,
सद्भाव,समभाव,सर्वजन सुखाय,पुरुषार्थ,स्वाभिमान के गुणों से युक्त हिँदुत्व का
उदय निश्चित है। घट -घट में राम को देखने की नीति दिखेगी,विश्व समुदाय हिँदुत्व
को कमतर नहीं आँकेगा ,कायर नहीं समझेगा उसका कायल हो जायेगा।             

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