रविवार, 25 मई 2014

बाप

बाप

बाप की थप्पड़-
दुनियाँ की अँधड़ से बचाती है;
क्योंकि -
उन की थप्पड़ में- 
अनुशासन का पाठ है ,
कर्तव्य का ज्ञान है ,
कुल के गौरव का ध्यान है ,
बाप की थप्पड़ -
दुनियाँ की थपेड़ों से बचाती है ;
क्योंकि -
उन की थप्पड़ में, 
सही -गलत की पहचान है,
लोक व्यवहार की खान है, 
स्वाभिमान की तान है, 
बाप की थप्पड़ -
दुनियाँ की थप्पड़ों से बचाती है; 
क्योंकि -
उन की थप्पड़ में ,
तपते भविष्य का सूरज है ,
सुनहरे जीवन के सितारे हैं,
दमकती रोशनी का चाँद है ,
सही मायने में 
बाप की थप्पड़ -
कच्चे लोहे को 
फौलादी इस्पात में 
बदलने की प्रक्रिया है। 
जब दुनियाँ की ठोकर ,
चकनाचूर कर देती है,
तब  
बाप से मिली नन्हीं सी ठोकर;
सारी दुनियाँ को बाँधना सिखाती है। 




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