बुधवार, 28 मई 2014

नैतिकता ,त्याग,पुरुषार्थ और सरकारी नीतियाँ =स्वर्णिम भारत

नैतिकता ,त्याग,पुरुषार्थ और सरकारी नीतियाँ =स्वर्णिम भारत 

सरकार बदल देने मात्र से जनता यह सोचे कि अच्छे दिन आ जायेंगे तो यह भूल
होगी। विगत साठ सालों में सरकारे आई और गई मगर अच्छे दिन दूर खिसकते
गये ,क्यों ?

सरकारी नीतियाँ और चालक बल -जनता अपने नेताओँ के आचरण का ही
अनुकरण करती है। नेता यदि आदर्श आचरण पर चलते हुये दिखे हैं तब जनता
भी आदर्शों का स्वेच्छा से अनुकरण करती है और जब नेता भ्रष्ट आचरण में
सिर तक डूबे रहते हैं तब जनता भी भ्रष्ट उपायों का खुला उपयोग करती है।
बड़ी विडंबना है कि जब हमारे पास साधन सीमित थे तब विश्व हमें सोने की
चिड़ियाँ से जानता था आज जब हमारे पास तुलनात्मक रूप से साधन ज्यादा
है तो विश्ब हमें गरीब राष्ट्र के रूप में जानता है। क्यों हुआ ऐसा ?जब देश का
चालक बल नैतिकता,राष्ट्रभक्ति ,त्याग और पुरुषार्थ खोने लगा और जनता पर
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर लगा कर अपने सुख आराम में लीन हो गया। जब
राजा ही जनता को लूटने लग जाए तो स्वर्णिम सपने भी दुःस्वप्न में बदल
जाते है। अच्छे दिन लाने के लिए सरकार को चाहिये कि वो जनता पर कर का
भार घटा दे,खोटे खर्चे बंद करे ,संवेदनशील बने और सरकारी छुट्टियाँ घटा कर
पुरुषार्थ करे।

जनता का कर्तव्य - अपनी सरकार चुन कर पाँच साल नींद लेना अकर्तव्य है।
आज तक जनता यही तो करती आयी है। सरकार चुन लेने मात्र से परिस्थिति
में आमूलचूल परिवर्तन नही आता है,सरकार चुनने के बाद सजग रहना पड़ता
है और पुरुषार्थी बनना पड़ता है। आज जनता में नैतिकता का स्तर गिरता जा
रहा है,लोग अपना रुपया बचाने के लिए अठ्ठनी भ्रष्ट लोगों पर खर्च कर देते हैं।
जनता में त्याग और राष्ट्र प्रेम दिखावा बन गया है,सरकारी नियमों की अवहेलना
करना आचरण में आ गया है। सरकार यदि काम करती है तो जनता उसको और
बढ़ाने में लग जाती है वह यह नहीं सोचती है कि सरकार के काम को बढ़ाने पर
अंतिम बोझ उसी पर आना है। हम बिना शर्म महसूस किये सड़कों पर कचरा
फैंक देते हैं,मिठ्ठे पानी में कचरा फैंकते हैं, कानून तोड़ आवारागर्दी करते हैं और
पुरुषार्थ छोड़ आलसी बन सरकार से अनुदान बाँटने की गुहार लगाते हैं।

स्वर्णिम भारत - अच्छे दिन देखने का संकल्प यदि देशवासियों में है तो उन्हें
नैतिक बनना होगा ,संवेदनशील रहना होगा ,दैवीय गुणों को आचरण में लाना
होगा और पुरुषार्थी बनना होगा। प्रजा यदि नैतिक ,पुरुषार्थी और सजग है तो
सरकार भी प्रजा के हित में काम करेगी। स्वर्णिम भारत के लिए सरकार जनता
के लिए सरल रास्ते तैयार करे और जनता कन्धे से कन्धा मिला कर उन रास्तों
पर आगे बढे।              

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