मंगलवार, 6 मई 2014

सप्ताह के नाम से साम्प्रदायिकता झलकती है

सप्ताह के नाम से साम्प्रदायिकता झलकती है

भारत में सप्ताह के नाम बदल दिये जाने चाहिए क्योंकि इन नामों से साम्प्रदायिकता 
झलकती है और भारत तो 1947 के बाद बिन सांप्रदायिक देश हो गया है। 

1947 के पहले का भारत युद्ध मे भी धर्म का पालन करता था मगर 1947 के बाद के 
भारत में धर्म भी अपना रुप खोकर निरपेक्ष हो गया है। 

भारत में नेता महात्मा गांधी ,नेहरू ,इंदिरा ,राजीव,काशीराम ,जयप्रकाश ,लोहिया आदि 
के नाम पर वोट माँग सकते हैँ मग़र श्री राम ,श्री कृष्ण ,भगवान शिव के नाम पर वोट 
नहीं माँग सकते क्योंकि श्रीं राम ,कृष्ण ,शिव के नाम पर वोट माँगने से धर्म निरपेक्षता 
खतरे में पड़ जाती है और गाँधी ,नेहरू ,काशीराम ,लोहिया के नाम से वोट माँगने पर 
निरपेक्षता मजबुत हो जाती है, वाह रे सेक्युलरिज्म !!

चुनावी समर धर्म युद्ध नहीँ होता है क्योंकि धर्म शब्द हीं सांप्रदायिक है इसीलिए 
नेता अधार्मिक आचरण करते हैं ,झूठे वादे करते हैं,पक्षपात करते हैं। 

कश्मीरी पंडितों और हिन्दु शरणार्थियो की बात ऱखने वाले नेता देश का माहौल ख़राब 
करते हैं क्योंकि इन पंडितों और शरणार्थियों की आत्मा और खून मे साम्प्रदायिकता 
बसी हुई है मगर देश मे घुसपेठियो के बसने और बसाने मे लगे लोगोँ और नेताओ मे 
धर्म निरपेक्षता बसती है। 

आतंकवादियों की मौत पर आँसू बहाने वाले नेता खुद को धर्म निरपेक्ष मानते हैं और 
देश के खातिर प्राण अर्पित करने वाले जवानो को गलत साबित करते है ,ये है सैक्युलरिज्म 

 क्या देश बदलना चाहते हो ? उठो ,जागो और मत के अधिकार क उपयोंग करों। 

आपका वोट झूठे और धूर्त नेताओं को हाशिये पर ला खड़ा करेगा। 
       

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