बुधवार, 21 मई 2014

विस्तृत हो नये भारत का PMO

विस्तृत हो नये भारत का PMO 

आचार्य चाणक्य ने राज व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मन्त्र दिये हैं।
राजा के मंत्री ही उसकी आँख होती है उन्हीं की मदद से राजा देश की सीमाओ से
परे तक हो रही हलचल को समझता है।

स्वतंत्र भारत की ताकत संसद है और PMO उसकी ताकत का ऊर्जा केंद्र है ,यदि
PMO लगातार ऊर्जा का उत्पादन और वितरण सुचारू रूप से करता है तो देश
के हर कोने में प्रकाश का होना स्वाभाविक है।

हमारा देश एक उपमहाद्वीप है ,जहाँ विभिन्न भाषाएँ हैं ,संस्कृतियाँ हैं और धर्म
हैं। यहाँ के हर राज्य की भौगोलिक स्थिति और जरुरत भिन्न -भिन्न है और
हर राज्य के विकास के लिए अभी जो व्यवस्था चल रही है उसमें आमूलचूल
परिवर्तन की आवश्यकता है। राज्य और केंद्र में अलग -अलग दलों की सरकार
होगी और उनमें आपसी मतभेद और टकराव हो जाने की स्थिति में देश का
विकास अवरुद्ध हो जाता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार देश के लिए होती है। आज तक की सरकारे
केंद्र में किस तरह चली और उनका राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार किसी से
छिपा नहीं है। अब जब युग परिवर्तन हुआ है तो जर्जर व्यवस्था के स्थान पर
नई व्यवस्था आनी चाहिये।

प्रधानमंत्री कार्यालय केवल दिल्ली से ही पुरे देश का नियंत्रण क्यों करे ,PMO
का स्वरूप विस्तृत होना चाहिये। हर राज्य की राजधानी में PMO का क्षेत्रीय
कार्यालय बनना चाहिए जो अपने मुख्य केंद्रीय कार्यालय और स्थानीय राज्य
सरकार की मदद में मुस्तैद रहे। क्षेत्रीय PMO में निष्णात व्यक्तियों की टीम हो
जो राज्य के विकास के लिए दी जा रही वित्तीय व्यवस्था तथा नयी वित्तीय
आवश्यकता पर नजर रखे और राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के प्रबंधन
पर नजर रखे और राज्य और केंद्र के बीच पुल का काम करे।

 PMO के विस्तृत स्वरूप का फायदा यह होगा कि राज्य व्यवस्था हर समय केंद्र से
सम्पर्क में रहेगी ,विकास के कामों को गति मिलेगी और प्रधानमन्त्री हर राज्य से
प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहेगा। देश के P M किसी भी राज्य में उपस्थित रहते हुये सहजता
से अपने काम को करते रहेंगे। 

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