शनिवार, 14 जून 2014

शिक्षा जगत दे सकता है -पर्यावरण और नैतिकता

शिक्षा जगत दे सकता है -पर्यावरण और नैतिकता 

पर्यावरण और नैतिकता से देश की बहुत सी रुग्णताएँ मिट सकती है और इस
अहम काम को पूरा करने के लिये स्कुल और कॉलेज के छात्रों को जोड़ा जाना
जरूरी है। आज देश में चल रही शिक्षा पद्धति में जो विषय प्रैक्टिकल रूप से
सिखाये जाने चाहिए उन्हें केवल रटाया जा रहा है जैसे -नैतिक शिक्षा और
पर्यावरण। क्या इन विषयों पर रट्टा लगाने से छात्र देश को कुछ दे पा रहे हैं ?
यदि नहीं तो फिर सरकारें नींद से जगती क्यों नहीं हैं ? देश का पर्यावरण
विभाग इतनी बड़ी शक्ति का सदुपयोग कब करना सीखेगा ?बाल विकास
मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय यदि सीधे और व्यावहारिक रूप से शिक्षा
जगत से जुड़ते हैं तो देश की तस्वीर दस साल में बदल सकती है।

पर्यावरण को बचाने के लिए किताबों का रट्टा लगाने से छात्र क्या सीखता है
क्यों नहीं हर क्लास वर्ग को किताबों की जगह इस विषय पर प्रेक्टिकल बनाया
जाये ?हर क्लास में बच्चों की टीम बना कर उनसे पेड़ लगवाया और उनका सरंक्षण
करना सिखाया जाये। सरकारें हर वर्ष पेड़ लगाने के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च
करती है मगर धरती हरी भरी नहीं होती है,क्यों ?क्योंकि इस काम में केवल खाना पूर्ति
होती है,दिखावा होता है। यदि कक्षा 6 में पढ़ने वाला छात्र एक पौधा लगाता है और कक्षा
बाहरवीं में आने तक उसका सरँक्षण करता है और उसके इस प्रेक्टिकल काम को जाँच
कर अध्यापक इस विषय में अँक देता है तो निश्चित रूप से यह धरती हरी भरी बन
सकती है। गाँव या शहर को स्वच्छ बनाये रखने में इस फोर्स का सदुपयोग किया जा
सकता है। गाँव के तालाब ,सड़के और सार्वजनिक स्थल को इस फोर्स की मदद से
स्वच्छ रखा जा सकता है। स्नातक की परीक्षा में पास होने के बाद हर छात्र को कम
से कम छः महीने के लिए कृषि के क्षेत्र से प्रेक्टिकल रूप से जोड़ा जाए और उसके बाद
डिग्री दी जाए ताकि हर नवयुवक श्रमदान करके कृषि के क्षेत्र से जुड़ सके और उसके
आधुनिकीकरण में अपना सहयोग दे सके। पर्यावरण की सुरक्षा को जन आंदोलन
बनाना है तो स्कुल जीवन से यह शुरुआत होनी चाहिये। कचरे को हटाने और उसका
उपयोग करने से स्वच्छ्ता आयेगी ,बीमारियाँ मिटेंगी और उसके रिसाइक्लिंग से
आर्थिक लाभ भी होगा।

नैतिकता का विषय रट्टा लगाने के पढ़ने का है क्या ?यह आचरण में लाने का विषय
है मगर हम इस विषय पर भी पुस्तकें पढ़ा देते हैं। क्या पुस्तकें पढ़ने मात्र से नैतिकता
आ जायेगी। क्या हमारे देश में नैतिक शिक्षा पढ़ाने वाले नैतिक आचरण का अमल करने
वाले अध्यापक वास्तव में हैं भी या नहीं हैं। नैतिकता का विषय जिसकी देश को ज्यादा
जरुरत है वह भी किताबी हो गया है। बच्चों में नैतिकता के गुण पैदा हो उसके लिए अच्छे
और गुणी शिक्षक की प्रेक्टिकल शिक्षा जरूरी है ,यदि बाल्यकाल से शिक्षक बच्चो में
सुसंस्कार का सिंचन करता है तो वही पुष्प जब युवा बन कर समाज में आयेगा तो समाज
दुर्गुण मुक्त बनेगा ,बलात्कार ,भ्रष्टाचार,आतंकवाद से मुक्त युवाओं का निर्माण होगा।         

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