सोमवार, 7 जुलाई 2014

क्या देश करवट बदलेगा ?

क्या देश करवट बदलेगा  ?

देश की नयी सरकार का पहला बजट आने वाला है और देश का बजट ही यह
तय करता है कि देश किस दिशा में जाने वाला है।

आज समस्या बढ़ती हुयी महँगाई नहीं है,समस्या है घटता हुआ रोजगार। यदि
बजट रोजगार उत्पन्न करने में सक्षम होता है तो महँगाई समस्या नहीं रहेगी।

ग्रामीण क्षेत्र हमेशा रोजगार से वंचित रहे हैं क्योंकि आज तक गाँवों को सुदृढ़
बनाने का सोचा तक नही गया। गाँवों तक औद्योगिक विकास नहीं पहुँच पाया
और ना ही कृषि को उद्योग का दर्जा मिला ,गाँवों को मिला अकुशल श्रमिक का
काम जैसे -मनरेगा!!!

                             आप कल्पना कीजिये कि भारत की 65 %से ज्यादा प्रजा
गाँवों में बसती है और इतनी बड़ी जनसँख्या को हम उद्योग से जोड़ने में असफल
रहे हैं। इसका कारण अब तक की सरकारों की नकारात्मक सोच है जो इतने
बड़े जनसमूह का उपयोग देश के विकास में करने में नाकाम रही। आज
महँगाई से सबसे ज्यादा कौन प्रभावित है ? गाँव ही ना। बड़ा अजीब समाधान
है खाद्य सुरक्षा जिसे काँग्रेस लायी थी और भाजपा आगे बढ़ा रही है। सोच जब
बूढी हो जाती है तो अजीबोगरीब उपचार और टोटके ढूंढे जाते हैं ,अगर मोदी
सरकार भी गाँवों के विकास को आगे नहीं बढाती है तो देश की नींद अभी टूटने
वाली नहीं है और विकास के सपने सिर्फ सपने और वादे ही रह जाने वाले हैं
क्योंकि गाँवों में जब तक रोजगार नहीं बढ़ेगा तब तक महँगाई के नाग का तांडव
रुकने वाला नहीं है। आम व्यक्ति गरीब इसलिए है कि उसके पास भरपूर काम
और काम की सही दिशा नहीं है। आज सस्ते में अनाज बाँट देने से क्या गाँवों की
बदहाल हालत सुधर जायेगी ?सरकार गरीब के पेट में रोटी पहुँचाने की जुगत में
है ,मगर यह खाद्य सुरक्षा का हल कब तक ? क्या गरीब का पेट भर देने मात्र से
विकास का रास्ता निकल जायेगा ? किसी भी सुराख़ पर पैबंद लगाना आकस्मिक
व्यवस्था हो सकती है मगर दीर्घकालीन व्यवस्था के लिए नव सर्जन जरूरी होता
है।

मोदी सरकार कृषि को उद्योग की तरह सुविधा दे ,व्यवस्था दे ,तकनीक दे ताकि
देश का अन्न भण्डार बढे और निर्यात से आर्थिक सुदृढ़ता आये।

मोदी सरकार लघु उद्योगो को गाँवों में बढ़ाये ,छोटे उद्यमियों को कर और निवेश
में सहायता दे ,गाँवों में बिजली की आपूर्ति और सड़कों का निर्माण  करे ताकि
लघु उद्यमी वहां रोजगार पैदा कर सके।  

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