गुरुवार, 28 अगस्त 2014

क्या हिन्दुओं के पर्व - त्यौहार साजिश का शिकार हो रहे हैं ?



क्या हिन्दुओं के पर्व - त्यौहार साजिश का शिकार हो रहे हैं ?

हिन्दुओं के हर त्यौहार को परम्परागत तरीके से मनाने पर अतिवादी,अंग्रेजी तोते ,
तथाकथित धर्मनिरपेक्ष,बिके हुए पत्रकार आये दिन ध्वनि प्रदुषण फैलाते रहते हैं और
उनके अनुपयोगी,असैद्धांतिक,अव्यावहारिक और सत्यहीन तर्कों पर अज्ञानी हिन्दू
बिना सोचे विचारे समर्थन भी कर देते हैं जैसे -

होली के त्यौहार पर ही अख़बार वाले हिन्दुओं को पानी से होली खेलने के विरुद्ध
उकसाते हैं और सूखी होली खेलने का प्रचार करते हैं,अगर पानी बचाने की इतनी
चिंता इन लोगों को है तो देश को ठण्डा पेय उपलब्ध करने वाली विदेशी कम्पनियों
के खिलाफ क्यों नहीं जाग्रत करते हैं जो प्रतिदिन लाखों लीटर पेयजल नष्ट कर रही
है।

हिन्दुओं के त्यौहार दिवाली पर पटाखे से वायु प्रदूषण फैलने के विज्ञापन ये शातिर
लोग पुरे देश में दिखाते हैं अगर इनको पर्यावरण से इतना ही प्रेम है तो ये लोग बूचड़
-खानों के खिलाफ प्रदर्शन क्यों नहीं करते हैं और उन कारखानों के खिलाफ आवाज
क्यों नहीं उठाते हैं जिनके कारण से देश की नदियां और हवा हर पल प्रदूषित हो रही
है।

हिन्दुओं के त्यौहार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्तियॉ का आकार छोटा
करने की और उनको विसर्जन से पानी प्रदुषित होने की बातें होती है मगर अन्य
समुदाय के लोगों के द्वारा उनके त्यौहार पर वायु और पानी प्रदुषण की बात पर ये
लोग खामोश हो जाते हैं।

हिन्दुओं के त्यौहार नवरात्री पर रात्रि के दस बजने के बाद साउंड पर प्रतिबन्ध लगाने
की प्रशासन द्वारा तथाकथित विद्वानों द्वारा पैरवी की जाती है और अन्य समुदायों को
उनके त्यौहार पर सप्ताहों तक रात भर हल्ला मचाने की छूट रहती है।

ये सब क्यों किया जा रहा है ?क्या हिन्दू धर्म को कमजोर करने की साजिश रची
जा रही है ? हिन्दुओं के त्यौहार मनाने के रिवाज और परम्परा पर सवालिया निशान
क्यों लगाये जा रहे हैं ?यह खेल निकृष्ट हिन्दुओं का साथ लेकर कौन खेल रहे हैं और
क्यों ? अपनी परम्परा को जीवित रखिये,परम्परा जीवित रहने से इतिहास नूतन
बना रहता है और इतिहास को समय -समय पर याद करते रहने से संस्कृति और
सभ्यता का गौरव बना रहता है। 













      

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