शनिवार, 30 अगस्त 2014

विनम्रता

विनम्रता 

लोहे के तार ने रबर के तार से कहा - तेरे शरीर में जान नहीं है,कितना दुर्बल
शरीर पाया है तुमने। मेरा शरीर देख,मैं लोहे का बना हूँ ,बहुत मजबूत हूँ।

रबर के तार ने कहा -मजबूत होना बुरा नहीं है दोस्त परन्तु मजबूती का
घमण्ड करना बुरा है।
कुछ दिन बाद बारिस आयी। बारिस को देख लोहे के तार को भय लगने लगा
और कुछ ही दिनों में जंग खा गया। लोहे के तार ने रबर के तार से पूछा -तुम
कमजोर होकर भी पानी को कैसे सहन कर लेते हो,जबकि मैं मजबूत होकर
भी टूटने की कगार पर हूँ?

रबर के तार ने कहा -तुम शक्ति के घमण्ड में चूर होकर अकड़ते हुये जीते रहे
और मैं विनम्र होकर जीता रहा। वक्त कब बदल जाता है मालुम नहीं पड़ता
दोस्त,तेरी अकड़ के कारण तू अंतिम साँसे गिन रहा है और मैं विनम्रता के
कारण कमजोर होते हुए भी शान से जी रहा हूँ।      


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