मंगलवार, 23 सितंबर 2014

दौलत

दौलत 

एक आदमी निराश हताश अवस्था में एक संत के पास पहुँचा और बोला- महात्मा ,
मेरे पर कृपा कीजिये ताकि मैं भी सुखी हो जाऊँ ?

महात्मा ने पूछा -तेरे पास किस चीज की कमी है जिसे पाकर तुम खुश हो सकते हो ?

वह आदमी बोला -महात्मन ,मेरे पास दौलत नहीं है और यही मेरे दुःख का कारण है।

महात्मा ने कहा -तुम झूठ बोल रहे हो। मुझे तो तुम ऐश्वर्यवान और सम्पन्न लग
रहे हो ?

वह आदमी बोला -महाराज यदि मैं सम्पन्न होता तो इस दयनीय हाल में नहीं रहता।

महात्मा बोले -तेरे दयनीय हाल में जीने का कारण या तो तेरी अज्ञानता है या फिर
तेरा हताश मन। अब बता तेरे को कितना धन चाहिए ?

वह बोला -महात्मन ,दौ से बीस लाख तक।

महात्मा बोले -तेरे पास दौ आँखे हैं इसमें से एक आँख दौ लाख में दे दे ?

वह बोला -यह कैसी माँग है एक आँख रहने पर मैं काणा हो जाऊँगा,आँख के बदले
दौ लाख़ नहीं चाहिये।

महात्मा बोले -चल आँख मत दे पर पाँच लाख लेकर दाहिना हाथ दे दे ?

वह बोला -बिना हाथ के मैं अपाहिज हो जाऊँगा और दाहिना हाथ क्या मैं पाँच
लाख के लिए तो अँगुली भी नहीं दूँगा।

महात्मा बोले -ऐसा कर ,दस लाख मैं एक गुर्दा दे दे तू एक गुर्दे से भी जी सकता है।

वह व्यक्ति बोला -एक गुर्दा दस लाख में देकर मैं अधमरा होकर नहीं जीना चाहता।

महात्मा बोले - तू तेरे हर अंग की कीमत बढ़ चढ़ के समझ रहा है फिर मेरे पास
दौलत के लिए क्यों आया ?क्या मेरे झोले में तेरे को दौलत नजर आती है ?

वह व्यक्ति बोला -फिर आप मस्तमौला बन के कैसे जीते हैं ?

महात्मा बोले -मैं अपनी कद्र खुद करता हूँ ,दिन भर के किये कर्तव्य से खुश हूँ और
जो कुछ मिला उसका आनन्द से उपभोग करता हुआ भगवान का कृतज्ञ भाव से
गुणगान करता हूँ। मेरे पास यही दौलत है जो जितनी मात्र में चाहता है मेरे से लेता
जाए।    

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