बुधवार, 31 दिसंबर 2014

शुभ कामनाएँ विक्रम संवत की ओर से ………

शुभ कामनाएँ  विक्रम संवत की ओर से ……

विक्रम संवत 2071 पोष शुक्ल 10 की ओर से ईस्वी सन 2015 के जन्म दिवस
पर शुभ कामनाएँ।

तुम में और मुझ में काफी अंतर है तनय ,पहला तो यही कि मैं तुमसे 57 साल
पहले जन्म ले चूका था। दूसरा मेरा जन्म तेरी तरह रात के घोर अंधकार में नहीं
बल्कि सूर्योदय की प्रथम किरण के साथ हुआ था। तीसरा मेरा DNA ब्रहा के साथ
जुड़ा हुआ है तो तेरा   .... जिसे मालूम है वो बताये क्योंकि मैं तेरे से बड़ा होकर भी
नहीं जानता हूँ। तेरे जन्म के साथ ही अश्लील नाच, मदिरा पान और भी बहुत सी
बुराइयाँ क्यों शुरू हो जाती है जबकि मेरे जन्म के साथ मंगल गान,पूजा अर्चना
के साथ होती है। तेरी तरह मेरे जन्म के समय आलिंगन की वीभत्सता नहीं है लेकिन
मेरे जन्म पर आशीर्वाद जरूर बरसता है।  तेरे जन्म पर प्रकृति भी ठंडी होकर जम
जाती है मगर मेरे जन्म पर माँ भारती की गोद में प्रकृति हरी हो जाती है।

मैं तब भी था जब कोई संवत ब्रह्माण्ड में नहीं था ,मेरे देखते -देखते कितने संवत
आये और चले भी जाएंगे परन्तु मुझे प्रलय तक बने रहना है। मेने ब्रहा की पृथ्वी
को सुसंस्कारों से सींचने का पूरी ताकत से प्रयास किया है। पुरे सौर मंडल की गति
को मेने परखा और समझा है लेकिन मैं तुझे समझ ही नहीं पाया हूँ क्योंकि तेरा
तारतम्य इनके साथ कभी भी नहीं रहा है।

मेरे भारत में तुझे 1957 में लाया गया वह भी एक हिन्दू सेक्युलर के कारण  …
जबसे तू आर्य खंड में आया है तबसे मैं दुःखी और पीड़ित हूँ। इसका कारण तू नहीं
तेरे अमर्यादित कुसंस्कार हैं। तूने मेरे बच्चों को सभ्यता की चासनी में जो जहर
बाँटना शुरू किया है वह मुझ से देखा नहीं जाता।

मेरी सलाह है तुम्हें तुम भी मेरे घर में रह मगर अतिथि बनकर। मेरे भारतवासियों
को कुसंस्कार में मत लपेट।  

सोमवार, 29 दिसंबर 2014

भारत में 2015 का बड़ा परिवर्तन ...

भारत में 2015 का बड़ा परिवर्तन

एक ही रहा कि धर्म निरपेक्षता सिकुड़ते हुये मौत की कगार पर आ गयी 👏👏👏और हिन्दु✊होकर बड़ा वोट बैंक बन गया✌️✌️✌️

2016 की सबसे बड़ी घटना यह होने वाली है कि सभी दल हिन्दु वोट बैंक की और रुख करते जायेंगे  🙏🙏🙏

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

हिन्दू नव वर्ष

हिन्दू नव वर्ष

हिन्दू नव वर्ष को संवत्सर कहा जाता है जो ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की उत्पति का प्रथम दिन है। यह दिन हिन्दू
माह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है।
संवत्सर काल को मापने की ऋषियों द्वारा खोजी गयी वैज्ञानिक विधि है जिसे सौर ,चन्द्र और नक्षत्र सावन
और अधिमास के आधार पर परखा गया है
सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा 365 दिन में पूरी करता है और चन्द्र 355 दिन में। तीन साल में यह अंतर 30 दिन का
होता है इसलिए अधिक मास की गणना की गई है.
रात्री के अँधेरे में नए दिन की शरुआत हिन्दू कलेंडर में नहीं होती है। हिन्दू कैलेंडर में दिन सूर्योदय से अगले
सूर्योदय तक माना जाता है।
हिन्दू त्यौहार चन्द्र कलेंडर के आधार पर मनाये जाते हैं। तिथियों का क्षय और बढ़ना चन्द्र की गति के आधार
पर है और चन्द्र की गति असमान है।
नव संवत्सर का प्रारम्भ यानि विक्रम संवत की स्थापना राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने ईसा पूर्व 57  साल में की
थी।
राजा विक्रमादित्य ने विदेशी राजाओं शक और हुण की दासता से भारत को मुक्त कराया था।
राजा विक्रमादित्य ने अखंड भारत के  नागरिकों के कर्ज को अपने राजकोष से चुका कर नव वर्ष की स्थापना
की थी।
राजा विक्रमादित्य चक्रवती सम्राट होने के बाद भी ऐश्वर्य का त्याग कर भूमी पर शयन करते थे और अपने
सुख के लिए राजकोष से धन नहीं लेते थे।
राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों में धन्वन्तरि (वैद्य )वराहमिहिर (ज्योतिषाचार्य )कालिदास ( साहित्यकार )शामिल
थे।
श्री राम ,कृष्ण ,बुद्ध ,महावीर ,नानकदेव की जयंती हिन्दू कलेंडर के आधार पर मनाई जाती है।
जवाहरलाल नेहरू ने २२ मार्च 1957 को ग्रेगेरियन कलेंडर को सरकारी कामकाज के लिए उपयुक्त समझ
इसे राष्ट्रिय कलेंडर घोषित किया !!और हम भारतवासी उसके बाद से हिन्दू नव वर्ष को छोड़ते चले गए
और 1 जनवरी को नया साल समझने और मनाने लग गये।
 नया वर्ष का ईसा के जन्म से भी संबंध नहीं है और ना ईसा की मृत्यु से , फिर भी जनवरी को नया वर्ष मानना
सिर्फ अवैज्ञानिक दृष्टिकोण है।
हिन्दू नव वर्ष को विश्व के कौन -कौन धर्मावलम्बी मनाते हैं ? कोई भी नहीं ,फिर हम किसी और के धर्म का
गुणगान क्यों करने लग जाते हैं और खुद के गौरव को छोड़ देते हैं ?







शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

चिंता की बात ………

चिंता की बात   ………

 
बहुसंख्या के बल से नेतागिरी शुरू होती है और बहुसंख्या की ताकत से सत्ता भी चलती है ,इस बात 
की ख़ुशी कम हो जाती है क्योंकि नेता बन जाने के बाद हर अदना सा आदमी इसी प्रजातंत्र में 
बहुसंख्यक लोगों के हित में कुछ भी करना अपना धर्म नहीं समझता है सब अल्पसंख्या के दल -
दल में फंसने का जुगाड़ बिठाने में उम्र गंवाते रहते हैं। 

चिंता इस बात की नहीं है कि किस धर्म के अनुयायियों की जनसँख्या बढ़ रही है मगर चिंता की 
यह बात जरूर है कि बहुसंख्यक का खून पानी बन रहा है ,कान बहरे हो रहे हैं ,जबान गूँगी हो 
रही है , आँखों से देखना नहीं चाहता है ,दिल कमजोर हो रहा है।

चिंता धर्मान्तरण की नहीं है मगर धर्मान्तरण का दोगलापन चिंता बना हुआ है। हिन्दू धर्म को 
त्याग कर कोई धर्मान्तरण करता है तो किसी के कान में जूँ नहीं रेंगती मगर कोई हिन्दू बनता 
है तो मक्कार दिलों को नागवार गुजरता है। 

चिंता की बात आतंक नहीं है क्योंकि इसका माकूल ईलाज  है ,दवा है। चिंता की बात यह 
है कि आतंक को पैदा करने वाले और पोषण करने वाले जिन्दा है। 

चिंता की बात गरीबी और भुखमरी नहीं है मगर चिंता की बात यह जरूर है कि गरीबी और 
भुखमरी को मिटाने की दवा पर ताकतवर लोग बेजा हक जमाये बैठे हैं। 

गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

कड़वी करेली

कड़वी करेली

पाकिस्तान में तीन दिन का शोक उनके लिये दुःख को सहने के लिए था जो उनके हुक्मरानों के कारण झेलना पड़ा मगर भारत के टी वी समाचार चैनल के लिये यह घटना सेक्युलिरीज्म के लिये मातम मनाने की है जिसे तब तक बताया जा सकता है जब तक इसे क्युमिनल हिंसा में ना खपा दिया जाये!!!

बुधवार, 17 दिसंबर 2014

समझाया था तुम्हें !!!


हिन्दुस्थान की ओर से पाकिस्तान में स्कुली बच्चों पर हुये हमले पर व्यथा और वहां की हुकूमत तो सीख-

समझाया था तुम्हें !!!

बरसों से 
समझाया था तुझे ,
छोड़ दे ये राह ए मातम,
क्योंकि -
इस राह पर आँसू  टपकते हैं
गम पसरा है 
घोर अँधेरा है 
निर्दोष सिसकियाँ है। 
मगर -
आज तक तूने 
अनसुना किया था 
नहीं की थी समझने कि कोशिश ,
क्योंकि- 
तुझे रंज ना था!
मेरा दुःख 
मेरी पीड़ा 
मेरा रोना 
मेरी टीस
तेरे सुकून में शामिल थे !!
तू, 
चेहरे पर नकाब ओढ़ 
सियार बन खड़ा था
जब-  
लहूलुहान थी मुंबई 
सिसक रही थी दिल्ली
सुलग रही थी घाटी   
खून सनी थी माटी।   
तेरे 
क्रूर शोख ने 
छीन लिए थे धरा से 
लाखों बाँके जवान 
हजारो बच्चों के पिता 
सैंकड़ों बहनों के भाई 
इंसानियत का चैन 
आज- 
तेरी राह ए मातम 
तुझे भी रुला रही है 
मुझे भी रुला रही है 
जगत को रुला रही है। 
एक बार फिर 
तुम्हें 
नेक सलाह -
लौट आ उस राह से 
जहाँ बर्बादियों के कांटे बिछे हैं 
आजा अमन की राह पर 
जहाँ इंसानियत के फूल खिले हैं।    

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

अजीब धर्मनिरपेक्ष

अजीब धर्मनिरपेक्ष 

नाम -मुलायम
धर्म -हिन्दू
-----------------
नाम -मायावती
धर्म -हिन्दू
------------------
नाम -ममता
धर्म -हिन्दू
----------------
नाम -नितीश
धर्म -हिन्दू
----------------
नाम -लालू
धर्म -हिन्दू
---------------
नाम -प्रकाश
धर्म -हिन्दू
---------------
नाम -अरविन्द
धर्म -हिन्दू
-------------
नाम -आजम
धर्म -मुस्लिम
--------------
नाम -ओवैशी
धर्म -मुस्लिम
-------------
नाम -रश्दी
धर्म -मुस्लिम
--------------
नाम -खुर्शीद
धर्म -मुस्लिम
---------------
… तो फिर धर्मनिरपेक्ष कौन ?
जबाब -कोई नहीं।
-----------------------------------------------------------
.... तो फिर धर्मनिरपेक्षता के नाम पर छाती पीटना क्यों ?
जबाब -यह इनको भी समझ में नहीं आता तो आपको कैसे आयेगा।
-------------------------------------------------------------
.... तो धर्मनिरपेक्षता लोगों को बेवकूफ बनाने का काम है ?
जबाब -सब समझते हो तो फिर सवाल क्यों करते हो।
-------------------------------------------------------

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

कोई शक

कोई शक 
भारत के मुस्लिम विश्व के सब देशों से ज्यादा अधिकार सम्पन्न है इस बात
में शक की गुँजाइश है क्या ?

भारत के बाहर मुस्लिम राष्ट्रों में रहने वाले हिन्दुओं को कितने अधिकार मिले
हैं इस सच को सब जानते हैं !!

क्यों तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता हिन्दुओं के अधिकारों के बारे में संघर्ष नहीं
करते हैं और देश के मुस्लिम वर्ग को जान बुझ कर तुष्टिकरण और उन्माद की
राह पर ले जाना पसन्द करते हैं ?

देश फैसला करता जा रहा है,फिर भी नासमझ नेता खोटे धर्मनिरपेक्ष वाद में
संगठित होकर डूबते जा रहे हैं,देश इनके चेहरों पर छिपे स्वार्थ और मक्कारी
को बारीकी से पढ़ना सीख गया है और सर्वधर्म समभाव के रास्ते पर चल पड़ा है।

देश के ओछे राजनीतिज्ञों! ये बचकाना हरकत बंद करो और सकारात्मक
विचार से राष्ट्र हित के लिए कर्म करो वरना भारत केवल काँग्रेस मुक्त ही
नहीं बल्कि एक ही पार्टी का देश बन जायेगा,इस बात में संदेह नहीं है।   

सोमवार, 8 दिसंबर 2014

कचरा

कचरा 

पप्पू ,उठो और कचरे पर निबंध सुनाओ ?

मेडम, कचरा बहुत पसंदीदा पदार्थ है .... !!

टीचर - साफ -साफ बताओ और सही से बताओ ?

पप्पू - कचरा एक मोहक और मनभावन पदार्थ है जिसे ईंटो और पत्थरो के बने
घर के फर्श से,सार्वजनिक स्थानों से झाड़ू से बुहारा जाता है और  …

टीचर - पूरा सही से बताओ ?

पप्पू - .... और उसे मानव अपने दिमाग ,मन और ह्रदय में इकट्ठा करके गाहे-बगाहे
       अपनों पर,रिश्तेदारो पर,दोस्तों पर,समाज पर,देश पर फेंकता रहता है।