बुधवार, 17 दिसंबर 2014

समझाया था तुम्हें !!!


हिन्दुस्थान की ओर से पाकिस्तान में स्कुली बच्चों पर हुये हमले पर व्यथा और वहां की हुकूमत तो सीख-

समझाया था तुम्हें !!!

बरसों से 
समझाया था तुझे ,
छोड़ दे ये राह ए मातम,
क्योंकि -
इस राह पर आँसू  टपकते हैं
गम पसरा है 
घोर अँधेरा है 
निर्दोष सिसकियाँ है। 
मगर -
आज तक तूने 
अनसुना किया था 
नहीं की थी समझने कि कोशिश ,
क्योंकि- 
तुझे रंज ना था!
मेरा दुःख 
मेरी पीड़ा 
मेरा रोना 
मेरी टीस
तेरे सुकून में शामिल थे !!
तू, 
चेहरे पर नकाब ओढ़ 
सियार बन खड़ा था
जब-  
लहूलुहान थी मुंबई 
सिसक रही थी दिल्ली
सुलग रही थी घाटी   
खून सनी थी माटी।   
तेरे 
क्रूर शोख ने 
छीन लिए थे धरा से 
लाखों बाँके जवान 
हजारो बच्चों के पिता 
सैंकड़ों बहनों के भाई 
इंसानियत का चैन 
आज- 
तेरी राह ए मातम 
तुझे भी रुला रही है 
मुझे भी रुला रही है 
जगत को रुला रही है। 
एक बार फिर 
तुम्हें 
नेक सलाह -
लौट आ उस राह से 
जहाँ बर्बादियों के कांटे बिछे हैं 
आजा अमन की राह पर 
जहाँ इंसानियत के फूल खिले हैं।    

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