रविवार, 8 मार्च 2015

भारतीय महिला-वैदिक काल और आज

भारतीय महिला-वैदिक काल और आज । 

बड़ा शोर मच रखा है महिला दिवस पर । सब हंगामें में लगे हैं-नेता,महिला मंच या मानवाधिकार वाले । 

५०% महिलायें विश्व में हैं उसके बाद भी दयनीय हाल? क्या इसके लिये पुरुष जिम्मेदार है या नारी भी । 

प्राचीन भारत में नारी आज के युग से ज्यादा स्वतन्त्र सभ्य ज्ञानशील थी । 

रावण जैसे असुर भी बलात्कारी नहीं थे और लक्ष्मण जैसे पुरुष कामी नहीं थे । 

प्राचीन महिलायें वीर,नीडर,शिक्षित थी उनकी कोमलता तन से नहीं ह्रदय से झलकती थी । सीता,अनुसूया,सावित्री,गंगा,गायत्री,दुर्गा,सरस्वती,लक्ष्मी,द्रोपदी,शारदा,लक्ष्मीबाई,पद्मिनी के जीवन चरित्र का हर पक्ष उज्जवल रहा जबकि उस समय आज जैसे आयोग भी नहीं थे । 

क्यों विश्व की महिलायें आज बलात्कार या अधिकारों का हनन सहन करने को मजबुर है । 

क्या पुरुषों का समुह जो स्वतन्त्रा उन्हें दे रहा है वह वास्तव में उनके लिये परतन्त्रा का नया जाल तो नहीं है?

नारी आज काया की आजादी को लेकर आज जितनी सचेत है पहले नहीं थी । क्या देह लालित्य का प्रदर्शन नारी को अधिकार सम्पन्न बना रहा है?क्या वर्तमान पहनावा और जीवन शैली उसको सबलता दे रहे हैं? फिर नारी क्या सोच कर उसको अपनाने में गौरव महसुस करती है । 

नारी से पुरुषों जितना काम करवाना और घर की जिम्मेदारी से मुक्त करना ही नारी स्वतन्त्रता का परिचायक है । 

प्राचीन नारी अपने बच्चों में सुन्दर संस्कार भरती थी,घर को अपव्यय से बचाती थीऔर वृद्ध जनों की सुन्दर देखभाल करती थी । आज की नारी अर्थ की दौड़ में बाकी सब छोड़ती जा रही है क्या यह देश का निर्माण कर पायेगा?

अधिकारों का संतुलन रहे इससे ही देश बनता है । केवल आर्थिक स्वतन्त्रता से काम नहीं बनेगा यह बात समझनी होगी । 

गुरुवार, 5 मार्च 2015

पंगु न्यायव्यवस्था और निर्भया

पंगु न्याय व्यवस्था और निर्भया 

निर्भया रेप कांड के आरोपी पर 

BBC की चंडाल सोच,भारतीय भांड पत्रकारिता,तात्कालिन सरकार और पंगु न्याय तन्त्र सब कहीं ना कहीं जिम्मेदार है । 

BBC की सोच अपराधी के प्रति सहानुभूति रखती है और भारत को बदचलन देश के रुप में विश्व में निचा दिखाने की कोशिश है जबकि खुद के देश की नारी पर रेप और जुल्म को छिपाती है । 

भारतीय भांड पत्रकारिता को देश की अस्मिता की परवाह नहीं है । ये घटिया सोच के लोग खुद के स्वार्थ के लिये देश की इज्जत को ही नहीं अच्छी पत्रकारिता की इज्जत को भी निलाम करते रहे हैं । 

तात्कालिन सरकार ने डाॅक्युमेनट्री बनाने की इजाजत विदेशी मीडीया को क्यों दी?क्या सोच थी उस सरकार की । हम वर्षो तक देश इनके हाथों में क्यों सोपते रहे जिन्हें भारतीय नारी खिलौना लगती है । 

हमारी रेंगती हुयी न्याय व्यवस्था का खस्ता हाल क्यों है कि उसे फैसला देते हुये जमाना बीत जाता है । क्या ये गुलामी के कानुन आम भारतीय को त्वरीत न्याय देने की ताकत रखता है?फिर भी हम इनके बोझ को ढोते रहते हैं । भारत सरकार भी कानुनों के मकड़जाल से निकल नहीं पाती है और BBC जैसे शातिर बच निकलते हैं । 

हम अपने रहन सहन पहनावे को बिना सोचे समझे बदले जा रहे हैं और कुपरिणाम भोगते जा रहे हैं

देख भाई,देश की पहचान उधार की संस्कृति पर नहीं चलती । हमें अपनी सभ्यता को सम्मान देना पड़ेगा । अपना त्वरित न्याय कानुन गढना होगा । भारत में वही चैनल मीडिया हो जिसका मालिक भारतीय हो ताकि देश द्रोही विचार पर लगाम लगे । 


रंगशाला की ठिठोली


ताऊ की मुंह पर लग रही नई बत्तीसी आली

सफेद बालो ने ओढ़ ली मेहंदी की लाली

आयने में देख मुसकान होठों पर झाली

छुकर निकल जाये इस बार कोई मदमस्त प्याली

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रंग ही रंग देख दिल से छटपटा रहे थे पति

सदाबहार के रंग से उकता गये थे पति

धरम के सात चक्कर में ठगे जाने की थी गति

दिल मसोस कर दाल पीने को है मजबुर पति

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होली कंवारे मन की मलक है

होली भीगती घटा की झलक है

होली रुप से रंग चुराने का फलक है

होली लावे पर ओस की खनक है

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Go Back BBC

Go BACK BBC


भारत की संस्कृती अस्मिता का प्रश्न है । सरकार कानुन के तहत ही काम करेगी पर हम सब भारतीय एक होकर इस भांड चैनल का बहिष्कार करें । इसकी वेबसाईट पर जाकर GO Back BBC के काॅमेंट लिखे । 

देख भाई,विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जो नारी के दुर्गा काली सरस्वती लक्ष्मी के रुप में पुजा करता है । भारत के अलावा कौनसा देश ऐसा है जहां नारी को देवी के रुप में पुजा जाता है । 

नारी स्वतन्त्रता के नाम पर पश्चिमी देशों ने उसे भोग्या बना दिया है । 

ये युरोपीय देश नारी की अश्लील कामुक फिल्मे बनाकर बेचने वाले लोग हैं,भारत गंदा देश नहीं है । इन पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था नारी के शरीर को विश्व में बेचकर चलती है ,भारत की अर्थव्यवस्था मेहनत के बल पर चलती है । 

ये खुद को सभ्य समझने वाले असभ्य लोग या देश नारी के तन के भुखे रहे हैं इसलिये ये मिस वर्ड मिस युनीवर्स मिस अर्थ जैसी कामुक प्रतियोगिता रख अपनी गंदगी विश्व में फैला रहे हैं जबकि हमारा भारत हजारों वर्षो से यत्र नारयस्तु पुजयन्ते का गान करता रहा है । 

क्या इंगलेन्ड अमेरीका तथा सभी पश्चिमी देश अपने अपने देश में हो रहे बलात्कार के आंकड़े विश्व पटल पर रखने की हिम्मत करेंगे । 

चेतो भारतीयों,ये वहशी चेनल भारत का अपमान कर रहे हैं इनका डटकर विरोध करो । 

बुधवार, 4 मार्च 2015

BBC भारतीय संस्कृती के खिलाफ?

BBC भारतीय संस्कृती के खिलाफ?

BBC निर्भया रेप के आरोपी पर आधारित डाॅक्युमेन्ट्री को विश्व में दिखाकर विश्व का कौनसा हित करने वाली है? विश्व के हर देश की अपनी संस्कृती और मान्यतायें हैं । भारत या विश्व इस डाॅक्युमेंट्री से बहुत कुछ खोयेगा क्योंकि यह सामाजिक आतंक फैलाने जैसा काम है । कोई बलात्कारी विश्व को क्या शिक्षा दे सकता है?

भारत सरकार की आज्ञा की अवहेलना कर BBC भारतीयों की भावना को आहत करने का काम करेगी क्योंकि हर भारतीय बलात्कारी दरिंदे की मौत की सजा देखना चाहती है ना कि BBC द्वारा उसको महिमामंडित करना पसंद करेगी । 

देख भाई,यह डाॅक्युमेंट्री भारत को गंवार बदचलन आवारा दिखाने का प्रयास है । सम्भल और BBC को नहीं देखने का संकल्प कर । हमें देश और उसकी अस्मिता का साथ देना होगा । यह वैचारिक हिंसा है जो BBC भारतीयों पर थोपना चाहता है,हमें डटकर विरोध करना है । 

अभिव्यक्ति की आजादी का यह मतलब नहीं कि भारत की ६५ करोड़ नारियों का अपमान हो या ६५ करोड़ पुरुषों को बदचलन भारतीय का आरोप सहना पड़े । 

सबसे ज्यादा नारी उत्पीड़न जिन देशों में है वे पहले अपने शर्ट की कालिख साफ करें फिर विश्व को शिक्षा दे । 

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

पुण्य वाणी से-

पुण्य वाणी से-


आज तक हमने उनको सहा पर आज 10 तक में पुछ ही लिया-


AAP की दिल्ली में बुरी तरह भद्द

पीटने का एक मुख्य कारण कौनसा होगा?


वो बोले- देखो जी, हमारे चक्र में कोई कमी नहीं थी । 10 दिन से 10 तक में आम आदमी को सिलसिलेवार यही ककहरा पढाया  कि AAP दिल्ली में 10तक दे रही है । पर क्या करें जब परत दर परत प्याज की तरह इस आवाम ने पुरी 12तक की पोल खोल के रख दी । 

खुद भी सर्वश्रेष्ठ बनने के चक्कर में डूबे ओर हमारी TRP से भी हम सर्वश्रेष्ठता का ताज डुबो बैठे । 


अौर एक प्रमुख ब्रेकिंग न्युज-


वो तो 10 को 9-2-11 हो लेंगे पर हमरा क्या होगा? यह सोच के लगता है झुनझुना थमाने के बदले वह झुनझुना मुझे झुनझुना थमा गया जी!!!

गुरुवार, 29 जनवरी 2015

तेरा बाप कौन?

तेरा बाप कौन?


कुछ अनजाने राहगीर पैदल जा रहे थे ।  पहचान करने के लिये एक ने पूछा- तुम कौन ?

दुसरा बोला-सामप्रदायिक । 

पहले ने पुछा- तेरा धरम कौनसा?

दुसरा बोला- सनातन । 

पहले ने पुछा- तेरा धरम का बाप कौन?

दुसरे ने कहा- विष्णु । 

पहले ने पुछा-तेरे धरम की माँ कौन?

दुसरा बोला- लक्ष्मी । 

पहला पुछते हुये चुप हो गया तो दुसरे ने पुछा-महोदय आप कौन?

पहला ने जबाब दिया- सेकुलर । 

दुसरे ने पुछा-आपका धरम कौनसा?

पहले ने कहा- मालुम नहीं । 

दुसरे ने पुछा-आपके धरम का बाप कौन?

पहले ने कहा- जी,पता नहीं । 

दुसरे ने कहा- तेरे धरम की माँ कौन?

पहले ने कहा- जी,मालुम नहीं । 

दुसरा बोला- मुझे तेरे अनाथ और लावारिस होने का दुःख है । 

AAP की हार क्यों जरुरी

AAP की हार क्यों जरुरी?


छद्म सेकुलरवाद या सेकुलरवाद की पराजय के लिये । 

जाति और धर्म के पक्ष पर वोट बैंक को तोड़ने के लिये । 

अराजकता के सम्पूर्ण सफाये के लिये । 

पृथकतावाद के जहर को रोकने के लिये । 

नकारात्मक विचारों के भ्रम से मुक्ति के लिये । 

पाप,धोखा,छल,ढ़ोंग,आडम्बरऔर झूठ के राजनैतिक डेंग्यु मच्छरों से देश को मुक्त करने के लिये

भारत को कमजोर बनाने वाली ताकतों को खत्म करने के लिये । 

तुष्टीकरण के दानव का वध करने के लिये । 

भारत के कश्मीर को अखंड रखने के लिये । 

शहीद जवानों की शहादत को पवित्र बनाये रखने के लिये । 

राष्ट्रवाद के अश्वमेघ की विजय के लिये । 

सब भारतीयों के विकास के लिये

सेकुलर स्वभाव होता है धर्म नहीं

वास्तव में सेकुलर कुछ होता ही नहीं है । भारत धर्म में आस्था रखने वाला देश है । यहां कोई हिन्दु है,कोई मुस्लिम,कोई ईसाई । सबकी अपने-अपने पवित्र धर्म पर आस्था है । यहां के प्रथम पुरुष की भी अपनी जाति होती है,पंथ प्रधान की भी जाति होती है और हर नागरिक की भी धर्म वर्ण जन्म के अनुसार जाति होती है । संसार में कहीं भी इंसान सेकुलर जाति का नहीं होता है । सेकुलर स्वभाव हो सकता है ।संविधान जब बना था तब देश धर्म प्रधान था । सेकुलर शब्द बाद में आया जिससे देश को नुकसान ही हुआ । विवादास्पद शब्द संविधान से हटे क्योंकि हमारी आस्था धर्म में है । 

सोमवार, 26 जनवरी 2015

भारतीय गणतंत्र और हिंदुत्व का विकास -

भारतीय गणतंत्र और हिंदुत्व का विकास -(विशेष -२६ जनवरी पर )

जब भारत का संविधान लिखा गया था तब भारत धर्म निरपेक्ष नहीं था। उस समय
हिंदुस्तान विभिन्न धर्मों का सरंक्षण करने वाला देश था। बाबा आंबेडकर ने इसलिए
संविधान में लिखा था कि सभी भारतीय नागरिक अपनी अपनी आस्था के अनुसार
स्वतंत्रता से अपने अपने धर्म का पालन कर सकता है यह हर भारतीय का मौलिक
नागरिक अधिकार है

1950 के समय हिन्दुओं में साक्षरता का अभाव था,बड़ी संख्या में हिन्दू निरक्षर थे.
वे उसी बात को सच मान लेते थे जो उसके नेता कहते थे। शास्त्री जी के काल में 
कुछ हद तक ठीक चला ( जवाहरलाल नेहरू के शासन काल को छोड़ते हुए )उसके
बाद इंदिरा गांधी का शासन आया और उन्होंने सत्ता को चलाने के लिए हिन्दू
समाज को तोडना चालू किया। हिन्दू धर्म को बातों से भ्रमित किया गया,उसकी
कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करके हिन्दुओं की जन्म आधारित
जाति व्यवस्था को अपनाया।

उस समय अस्पर्शनीय मानी जाने वाली जातियों को कानून बनाकर जन्म के
आधार पर दलित मान लिया गया और उन्हें विकास के लालच का झुनझुना
थमा दिया,नतीजा यह हुआ कि हिंदुत्व कमजोर हुआ और उसका फायदा इंदिरा
गाँधी को मिला।काश !उस समय दलित आयोग की जगह निर्धन आयोग बनता।

उसके बाद सत्ता पाने की खातिर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति ,आदिवासी ,
अन्य जनजाति आदि जन्म आधारित व्यवस्था विकसित होती गयी. हिन्दुओ के
दिमाग को वॉश किया जाता रहा. हिन्दू अपने ही जाति के नेताओं से शोषित होता
रहा. हिन्दुओं से सिक्खों को,बौद्ध को और जैन जाति को तोडा जाता रहा.

दलित को आरक्षण का झुनझुना थमा कर हिन्दुओं की जन्म आधारित ऊँची जातियों
से द्वेष और भेद बढ़ाया जाता रहा. परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस की हिन्दुओं में
फूट डालो और राज करो की नीति सफल हो गयी और शासन पर काँग्रेस का
एकाधिकार हो गया

कांग्रेस का अधिकार टूटे नहीं और वंश परम्परा से भारत का शासन चलता रहे
इसके लिए धर्म निरपेक्ष राष्ट्र का अध्यादेश लाया गया.. धर्म निरपेक्ष का अर्थ
संविधान में यह बताया गया कि हर धर्म के प्रति तटस्थता।हिन्दुओं को फिर
मुर्ख बनाया गया और उसे मानवतावाद की घुट्टी पिलाई।जो हिन्दू कांग्रेस में
थे वे भी सत्ता सुख के लिए आम निरक्षर भारतीय को बेवकुफ बनाते गये।

उसके बाद काँग्रेस ने सत्ता को हाथ से निकलते देख धर्म निरपेक्षता को शुद्ध
मुस्लिम तुष्टिकरण में बदल दिया। संविधान को बहुमत चाहिए था और
बहुमत के लिए एक मजबूत फॉर्मूला बनाया गया - दलित हिन्दू ,अन्य दलित
वर्ग ,अनुसूचित जनजाति ,आदिवासी और मुस्लिम गठजोड़ के साथ जाती में
बँटकर वोट करने वाला सवर्ण हिन्दू। इसे आप समाजवाद भी कह सकते हैं.

काँग्रेस,समाजवादी,कम्युनिस्ट के लोग हिन्दू के जाग्रत होने पर सत्ता से दूर
होने लगा तो ये सब हिन्दुओं के बड़े वर्ग की उपेक्षा कर साँसद विधायक चुनने
के बाद सत्ता के लिए गठजोड़ करने लगे. इसका नतीजा यह हुआ कि देश के
धन को लूटा और दुरपयोग किया जाने लगा ,देश रसातल में डूबता गया.

देश को अब जागना होगा।बहुत टूट चुके अपने ही देश के नेताओं द्वारा।
हिन्दुस्थान के विकास के लिए हिंदुत्व का विकास जरुरी है. हिन्दू समाज को
जन्म आधारित व्यवस्था से बाहर निकल कर कर्म आधारित व्यवस्था लानी
होगी।अब उन्हें शूद्र करार दिया जाये जो सवर्ण जाति में जन्म लेकर भी कर्म
से सेकुलर ,पक्षपातवादी ,ढोंगी और स्वार्थी हो चुके हैं.

मेरा हिन्दुत्व एक जाति नहीं है बल्कि एक जीवन पद्धति है जो सर्वधर्म समभाव
में आस्था रखता है,परोपकार ,मानवता,करुणा दया,विकारहीनता,निडरता में
आस्था है.उसे ना तो  ईसा से द्वेष है,ना पैगम्बर से.. हिन्दू धर्म तो अच्छाइयों
का सागर है जो सब धर्मों के गुणों को समाहित कर लेता है                             





  
                 

राष्ट्र माता को नमन


क्या एक सप्ताह के लिये हम अपने फेसबुक एकाउन्ट पर भारत माता की कृतज्ञता प्रकट करते हुये अपनी फोटो की जगह भारत माता की फोटो लगाकर श्रद्धा जतला़येंगे । 

आइये,और इस मिशन को आगे बढाइये । 

भारत माता की जय

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

आजादी तो 1947 के पहले ही मिल जाती (सुभाष बोस पर विशेष )

आजादी तो 1947 के पहले ही मिल जाती (सुभाष बोस पर विशेष )


"स्वतंत्रता खून मांगती है 'शीश फूल मांगती है। तुम मुझे खून दो ,मैं तुम्हे आजादी दूँगा "-जयहिंद 
यह वाक्य नहीं है यह एक मन्त्र है जिसकी ताकत से आजाद हुआ हिंदुस्तान 
किस तरह सुभाष देश में पंप रहे कायरता पूर्ण विचारों से लड़ते रहे। गांधी की गलतियों पर सुभाष 
नाराज थे। गांधी मौत के बिना युद्ध जीतना चाहते थे और सुभाष जानते थे कि युद्ध हमेशा शस्त्रों से 
लड़े और जीते जाते हैं
  क्यों स्थगित किया गांधी ने असहयोग आंदोलन  ?
उसका भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर क्या असर पड़ा ?    
असहयोग आन्दोलन के स्थगन पर मोतीलाल नेहरू ने कहा कि, "यदि कन्याकुमारी के एक गाँव ने 
अहिंसा का पालन नहीं किया, तो इसकी सज़ा हिमालय के एक गाँव को क्यों मिलनी चाहिए।" 
अपनी प्रतिक्रिया में सुभाषचन्द्र बोसने कहा, "ठीक इस समय, जबकि जनता का उत्साह चरमोत्कर्ष 
पर था, वापस लौटने का आदेश देना राष्ट्रीय दुर्भाग्य से कम नहीं"। आन्दोलन के स्थगित करने का 
प्रभाव गांधी जी की लोकप्रियता पर ख़राब पड़ा।
क्या था गांधी इरविन समझोता ?
गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च1931 ई. को हुआ था। महात्मा गाँधी और लॉर्ड इरविन के मध्य 
हुए इस समझौते को 'दिल्ली पैक्ट' के नाम से भी जाना जाता है। गाँधी जी ने इस समझौते को 
बहुत महत्त्व दिया था, जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरू और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने इसकी
 कड़ी आलोचना की। कांग्रेसी भी इस समझौते से पूरी तरह असंतुष्ट थे, क्योंकि गाँधी जी भारत
 के युवा क्रांतिकारियों भगत सिंहराजगुरु और सुखदेव को फाँसी के फंदे से बचा नहीं पाए थे।

समझौते की शर्तें

इस समझौते की शर्तें निम्नलिखित थीं-
  1. कांग्रेस व उसके कार्यकर्ताओं की जब्त की गई सम्पत्ति वापस की जाये।
  2. सरकार द्वारा सभी अध्यादेशों एवं अपूर्ण अभियागों के मामले को वापस लिया जाये।
  3. हिंसात्मक कार्यों में लिप्त अभियुक्तों के अतिरिक्त सभी राजनीतिक क़ैदियों को मुक्त किया जाये।
  4. अफीम, शराब एवं विदेशी वस्त्र की दुकानों पर शांतिपूर्ण ढंग से धरने की अनुमति दी जाये।
  5. समुद्र के किनारे बसने वाले लोगों को नमक बनाने व उसे एकत्रित करने की छूट दी जाये।
  • महात्मा गाँधी ने कांग्रेस की ओर से निम्न शर्तें स्वीकार कीं-
  1. 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' स्थगति कर दिया गया जायेगा।
  2. 'द्वितीय गोलमेज सम्मेलन' में कांग्रेस के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।
  3. पुलिस की ज्यादतियों के ख़िलाफ़ निष्पक्ष न्यायिक जाँच की मांग वापस ले ली जायेगी।
  4. नमक क़ानून उन्मूलन की मांग एवं बहिष्कार की मांग को वापस ले लिया जायेगा।
मनाया जाना था 26 जनवरी १९३० को पहला स्वतंत्रता दिवस - बोस  चाहते थे कि अंग्रेजों को 
बातों से नहीं मौत के घाट उतार करके ही मकसद पाया जा सकता है। उनकी पूरी तैयारी थी पर 
कायर अहिंसा के विषाद पूर्ण वचनो ने सब गुड गोबर कर दिया  
कड़वा  सच 
26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व कर
 रहे थे तभी पुलिस ने उन पर लाठी चलायी और उन्हें घायल कर जेल भेज दिया। जब सुभाष जेल 
में थे तब गान्धीजी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया।
 लेकिन अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने से साफ इन्कार कर दिया।
 भगत सिंह की फाँसी माफ कराने के लिये गान्धी ने सरकार से बात तो की परन्तु नरमी के साथ।
 सुभाष चाहते थे कि इस विषय पर गान्धीजी अंग्रेज सरकार के साथ किया गया समझौता तोड़ दें।
 लेकिन गान्धी अपनी ओर से दिया गया वचन तोड़ने को राजी नहीं थे। अंग्रेज सरकार अपने
 स्थान पर अड़ी रही और भगत सिंह व उनके साथियों को फाँसी दे दी गयी। भगत सिंह को न बचा
 पाने पर सुभाष गान्धी और कांग्रेस के तरीकों से बहुत नाराज हो गये।
कांग्रेस अध्यक्ष -सुभाष बोस की व्यूह रचना और गांधी का भीरूपन 
1938 में गान्धीजी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाष को चुना तो था मगर उन्हें सुभाष की
 कार्यपद्धति पसन्द नहीं आयी। इसी दौरान यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध के बादल छा गए थे।
 सुभाष चाहते थे कि इंग्लैंड की इस कठिनाई का लाभ उठाकर भारत का स्वतन्त्रता संग्राम 
अधिक तीव्र किया जाये। उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में इस ओर कदम उठाना भी शुरू
 कर दिया था परन्तु गान्धीजी इससे सहमत नहीं थे।
1939 में जब नया कांग्रेस अध्यक्ष चुनने का वक्त आया तब सुभाष चाहते थे कि कोई ऐसा
 व्यक्ति अध्यक्ष बनाया जाये जो इस मामले में किसी दबाव के आगे बिल्कुल न झुके। ऐसा
 किसी दूसरे व्यक्ति के सामने न आने पर सुभाष ने स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष बने रहना चाहा।
 लेकिन गान्धी उन्हें अध्यक्ष पद से हटाना चाहते थे। गान्धी ने अध्यक्ष पद के लिये पट्टाभि 
सीतारमैया को चुना। कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गान्धी को खत लिखकर सुभाष को ही 
अध्यक्ष बनाने की विनती की। प्रफुल्लचन्द्र राय और मेघनाद साहा जैसे वैज्ञानिक भी सुभाष
 को ही फिर से अध्यक्ष के रूप में देखना चाहतें थे। लेकिन गान्धीजी ने इस मामले में किसी की
 बात नहीं मानी। कोई समझौता न हो पाने पर बहुत बरसों बाद कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद के 
लिये चुनाव हुआ।
सब समझते थे कि जब महात्मा गान्धी ने पट्टाभि सीतारमैय्या का साथ दिया हैं तब वे चुनाव 
आसानी से जीत जायेंगे। लेकिन वास्तव में सुभाष को चुनाव में 1580 मत और सीतारमैय्या 
को 1377 मत मिले। गान्धीजी के विरोध के बावजूद सुभाषबाबू 203 मतों से चुनाव जीत गये।
 मगर चुनाव के नतीजे के साथ बात खत्म नहीं हुई। गान्धीजी ने पट्टाभि सीतारमैय्या की हार 
को अपनी हार बताकर अपने साथियों से कह दिया कि अगर वें सुभाष के तरीकों से सहमत 
नहीं हैं तो वें कांग्रेस से हट सकतें हैं। इसके बाद कांग्रेस कार्यकारिणी के 14 में से 12 सदस्यों ने
 इस्तीफा दे दिया। जवाहरलाल नेहरू तटस्थ बने रहे और अकेले शरदबाबू सुभाष के साथ रहे।
1939 का वार्षिक कांग्रेस अधिवेशन त्रिपुरी में हुआ। इस अधिवेशन के समय सुभाषबाबू तेज 
बुखार से इतने बीमार हो गये थे कि उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर अधिवेशन में लाना पड़ा।
 गान्धीजी स्वयं भी इस अधिवेशन में उपस्थित नहीं रहे और उनके साथियों ने भी सुभाष 
को कोई सहयोग नहीं दिया। अधिवेशन के बाद सुभाष ने समझौते के लिए बहुत कोशिश की
 लेकिन गान्धीजी और उनके साथियों ने उनकी एक न मानी। परिस्थिति ऐसी बन गयी कि
 सुभाष कुछ काम ही न कर पाये। आखिर में तंग आकर 29 अप्रैल 1939 को सुभाष ने 
कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
आजाद हिन्द फौज की स्थापना 
आजाद हिन्द फौज ने किस तरह फिरंगियों की कमर तोड़ी इसे पूरा विश्व जनता है। . भारत के सपूत सुभाष 
और गांधी दोनों में से मेरा माथा सुभाष बोस के लिये झुक जाता है।  

मंगलवार, 20 जनवरी 2015

निर्धन उत्थान आयोग

निर्धन उत्थान आयोग

अल्प संख्यक आयोग को भंग कर देना आवश्यक हो गया है क्योंकि यह भारतीय नागरिकों में पृथकता उत्पन्न करता है । भारत में हर धर्म के नागरिक को समानता का अधिकार है तो १९९३ में इसकी स्थापना में किसका स्वार्थ पुरा हुआ ?
क्या इस आयोग से ईसाई,सिख जैन पारसी या मुस्लिम का भला हुआ ?नहीं---। तो फिर धर्म निरपेक्ष राष्ट्र में धर्म के आधार पर यह आयोग क्यों लाया गया?
क्या इस आयोग के आने के बाद हिन्दु और अल्पसंख्यकों में प्रेम भाईचारा बढ़ा?
क्या अल्पसंखयकों का सामाजिक स्तर सुधरा?
क्या अल्पसंख्यकों की आर्थिक स्थिती में सुधार आया?
क्या अल्पसंख्यकों की शैक्षणिक योग्यता बढी?
फिर यह आयोग को भंग क्यों नहीं किया जाता है?
केवल भारतीय नागरिकों की पृथकता को बनायें रखने का काम किया इस आयोग ने । 
भारत के नागरिकों, यह आयोग फूट डालो और राज करो के सिद्धांत को आगे बढा रहा है । हम सबको साथ मिलकर सरकार को इस आयोग को भंग करने तथा इसके स्थान पर निर्धन उत्थान आयोग की स्थापना करने को कहना होगा । 
निर्धन भारतीय के कल्याण में एकता बढेगी । धार्मिक तुष्टीकरण का राजनैतिक जहर प्रभावहिन हो जायेगा । सब गरीब निर्धन वंचित वर्ग के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा ।

रविवार, 18 जनवरी 2015

आज राष्ट्र साम्प्रदायिकता से क्यों जुड़ रहा है?

आज राष्ट्र साम्प्रदायिकता से क्यों जुड़ रहा है?
नरेन्द्र मोदी पुरे स्वार्थी सेकुलर जमात के लिए साम्प्रदायिक रहे और आज भी है मगर इस साम्प्रदायिक नेता को शक्ति गुजरात के हिन्दुओं ने दी,यह इतिहास का सत्य है । गुजरात के हिन्दु किसी मजहब के खिलाफ संगठित नहीं हुये वे आतंक से जुड़े दुष्टों के खिलाफ एकता में बंधे । यह एकता अन्य मक्कार लोगों के हित के खिलाफ थी मगर गुजरात डटा रहा और बार बार सेकुलर वाद को अंगूठा दिखाता रहा । गुजरात में संगठित हिन्दुओं को देख आतंक भागता नजर आया और विकास का मार्ग खुला जिसे विश्व गुजरात माॅडल कहता है । अब बताओ कि संगठित हिन्दु सबके हित में सबके विकास का कारक है कि नहीं ।
देश का हिन्दु संगठित बने यह विकास का पहला चरण है और इससे आतंकवाद डरता है ।

केजरी,न्युज सेकुलरी और देश

केजरी,न्युज सेकुलरी और देश
जीत तो जीत होती है
जीतना अहम होता है और उसके लिए केवल नैतिकता ही रास्ता नहीं बनती । जीत के लिये यह देखना जरुरी होता है कि हम हराना किसको चाहते हैं । लड़ने वाला असुर है तो जीतने के लिए छल का सहारा लेना पाप नहीं है । लड़ने वाला आतंकी है तो जीतने के लिए अनैतिक तरीका भी नैतिक माना जाता है । प्रतिस्पर्धी छल का उपयोग करता है तो उसको हराने के लिए झूठ का उपयोग भी नीति है ।
आज तक से ND(नकारा दर्शन) तक BJP को नैतिकता का पाठ सीखाने की मुहिम छेड़ रखी है,किसके हित के लिए??? खुद की गरज साधने के लिए आम आदमी को मोहरा बना रही है ।
ये पेड खबरी क्या यह भी नहीं जानते हैं कि आम आदमी को कोरी लफ्फाजी से गुमराह नहीं किया जा सकता है । आम आदमी को सौ झूठ बताने से भी वो अपने नजरीये से हर बात का उस पर क्या असर हो सकता है से तोलता है और निर्णय करता है ।
मोदी का विरोध इन चैनलों ने खूब किया,बेचारों का गला बैठ गया मगर जनता ने इन्हें नकार दिया । आज ये सेकुलर खबरी केजरी की पीठ पर थपकी दे रहे हैं मगर जनता इन सेकुलरों की TRP बिगाड़ने का संकल्प कर चूकी है ।

आप पार्टी और बीजेपी

आप पार्टी और बीजेपी
क्या काँग्रेस दिल्ली से खत्म हो गयी है ?
बीजेपी की मुख्य टक्कर क्या आप पार्टी से है?
दोनों का उत्तर ना है!!गले नहीं उतरती है यह बात । 
काँग्रेस,आप,सेकुलर दल ये सब एक ही है और ये सब काँग्रेस की ही धारा़यें हैं इनका अलग अस्तित्व है ही नहीं पर फिर भी आम भारतीय को आप और काँग्रेस को मीडिया अलग दिखा रहा है । इसका कारण क्या?
दिल्ली को बदहाल किसने किया? किसने बिगड़ने दी वहाँ का लाॅ एन्ड आॅर्डर? क्या बीजेपी ने? तो फिर--- अब बीमार दिल्ली पर शासन करने के लिये रेपर लेबल झन्डा टोपी और चेहरा बदल दिया । नारे तो इन्दिरा गाँधी ने भी दिये, क्या उन्हें पूरा किया? नहीं किये ना! पर अलग-अलग लफ्फाजी से भारतीयों को बरगलाया गया और हमने उन्हें वर्षों तक झेला । अब जब भरपूर घोटालों से ब्रान्ड बदनाम और अनुपयोगी होने लगा तो नये नाम से देश के सामने पेश किया जा रहा है । सावधान-- उल से चूल का नाटक खेला जा रहा है सब स्वार्थी सेकुलरों द्वारा ।
फंसना मत----
आँखे खोलो, मीडिया कुटील चाल चल रहा है । काँग्रेस ब्रांड खत्म हो गया है और सेकुलर दवा आउट आॅफ डेट ।
मोदी के राष्ट्रवाद को माने देश का भला है इसमें ।

शनिवार, 17 जनवरी 2015

विश्वास के मन से-

विश्वास के मन से-


हर पल बात बदलने से

विश्वास का विश्वास भी टूट गया

हर चाल में स्वार्थ रखने से

खुद का घर भी बिखर गया

कुछ शुकनी जैसे सलाहकार

अब भी दांव पेच सिखलाते हैं

टोपी के ऊपर भी टोपी रख

रुप बहरुप बनाते हैं

झुठ कपट छल भ्रम माया से

अब जीता जाता देश नहीं

कुसंगी के संग करने से लक्ष्य भेदन सम्भव नहीं

सुन अरविन्द,कर कुछ विश्वास तो मेरा भी

केवल रायता फैलाने से भला देश का हुआ नहीं

चेहरे पर चेहरा चिपकाना काँग्रेस का खेल रहा

केवल कुरसी पाने के खातिर चरित्र बेचना ठीक नहीं

एक एक कर सब निकल रहे इस फिरंगी टोली से

देश द्रोह की बातें करने वाले बचे हैं बाकी टोली में

सुन विश्वास से,विश्वास की बात,लात मार इस टोली से

आ चलें उस ओर,मोदी से राष्ट्र भक्त की टोली में

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

पुण्य वाणी

AAP उवाच-है मतदाता,हमारे अतीत को याद मत करो और मोदी के वर्तमान भुतकाल तथा भविष्य काल को । 

हे मतदाता,अन्ना के आन्दोलन को याद मत करो क्योंकि उस छत्ते में जितना शहद था मेनें चूस लिया,अब अन्ना के पास संत व्यवहार और ईमानदारी के आचरण के कुछ नहीं बचा है । 

हे मतदाता, मेरे पास बदलने वाणी और माथे की टोपी दोनों है क्या मोदी के पास है?

मेरे को सुनने के लिए पुण्य वाणी, कश्यप कुहूक,रद्दीश की जुबान,TV48\2 सुनते रहे । 

हमारे सरकार चलाने का एक नमुना- कजरी ढाबा में एक समय का भोजन सिर्फ 20000/- में 

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

विकसीत भारत की शुरुआत ?

विकसीत भारत की शुरुआत ?

सरकार इसकी शुरुआत किसान और गाँव से हो । किसान को आधुनिक टेक्नोलोजी मिले,उन्नत बीज और मिट्टी के अनुरुप रसायन मिले । फल फसल और सब्जी के भन्डारण के साधन कम दाम में उपलब्ध हो । बिजली पर्याप्त समय तक मिले । गाँव में अति लघू और लघू उध्योग के लिए नयी टेक्नोलोजी का विकास हो । इससे महंगाई मिटेगी गांव में रोजगार मिलने से गांवो से शहरों की ओर पलायन रुकेगा अपराध और बुरी आदतें कम होगी   

Smart City की जरुरत कम और Smart Village की जरुरत अधिक है । मोदी सरकार इस अर्थ नीति पर ध्यान देगी?

सोमवार, 5 जनवरी 2015

पंछी

पंछी


भोर की किरण में जब चहचहाता हुँ मैं,

सुबह होने का ख्याल दे जाता हुँ मैं । 

जब सुबह भरता हुँ उडान चुग्गे के खातिर,

तब ज्ञान कर्म का तुम्हें भी सुनाता हुँ मैं । 

साँझ ढले लौटा जब नीड़ की ओर,

तुम्हे भी घर लौट आने का कह

आता हुँ मैं । 

तेरी खुशीयों में सदा तेरे साथ रहा

तेरे आँगन में फुदकता नाचता रहा

मेरे गगन में उड़ने का न्योता दिया

मगर तुमने उसका मुझे क्या सिला दिया!!

मेरे आसमां में क्यों सजायी काँच लिपटी ये डोर,

समझा प्यार का धागा और दौड़ा उस ओर । 

कटे पर,लथपथ आ धरती पर घिरा

जाऊ छोड़ ये जगत पर मेरा दोष बता,

सजा ए मौत का फरमान तुने क्युं मुझको भेजा?


(पक्षियों की आवा जाही गगन में सुबह 6 -8 और शाम 5-7 बजे ज्यादा रहती है उस समय पतंगबाजी बन्द करके पक्षियों की जान बचायी जा सकती है)